“मैं चुनाव नहीं हारता, जनता हारती है”, 280 से अधिक चुनाव लड़ने वाले धरती पकड़ नहीं रहे

भागलपुर के ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया अब नहीं रहे, लेकिन उनकी चुनावी कहानी आज भी हैरान करती है। 280 से ज्यादा चुनाव लड़ने वाले बाजोरिया ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और कई दिग्गज नेताओं को चुनौती दी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 4 September 2026, 2:54 PM IST
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Bhagalpur: बिहार के भागलपुर के चर्चित समाजसेवी और ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर नागरमल बाजोरिया का 96 वर्ष की उम्र में पटना में निधन हो गया। उनकी पहचान सिर्फ एक कारोबारी या समाजसेवी के तौर पर नहीं थी, बल्कि देश के सबसे ज्यादा चुनाव लड़ने वाले चर्चित उम्मीदवारों में होती थी। नगर निकाय के चुनाव से लेकर राष्ट्रपति पद तक उन्होंने 280 से ज्यादा चुनावों में किस्मत आजमाई।

इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक को दी टक्कर

नागरमल बाजोरिया का चुनावी सफर बेहद अलग रहा। उन्होंने रायबरेली से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके अलावा अमेठी में राजीव गांधी को चुनौती दी। संजय गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ भी वे चुनाव मैदान में उतरे।

1969 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव में वी.वी. गिरि के खिलाफ नामांकन दाखिल किया था। कई दशक बाद 2012 में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, हालांकि उनका नामांकन खारिज हो गया।

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जीत से ज्यादा संदेश देने पर था जोर

280 से ज्यादा चुनाव लड़ने के बावजूद नागरमल बाजोरिया कभी कोई बड़ा चुनाव नहीं जीत सके। हालांकि, उनके परिवार के मुताबिक चुनाव उनके लिए सिर्फ जीत-हार का खेल नहीं था। उनके पोते सौरव बाजोरिया ने बताया कि वे चुनाव के जरिए आम लोगों को यह संदेश देना चाहते थे कि लोकतंत्र में एक सामान्य व्यक्ति भी बड़े से बड़े नेता के सामने खड़ा हो सकता है।

करीब 30 साल की उम्र में उन्होंने भागलपुर नगरपालिका का चुनाव जीता भी था। इसके बाद चुनाव लड़ना उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया। वे मजाकिया अंदाज में कहा करते थे, “मैं चुनाव नहीं हारता, बल्कि जनता हमेशा हारती है।”

गधों की रैली से लेकर घड़ी-घंट तक

नागरमल बाजोरिया अपने अलग अंदाज के प्रचार के लिए भी खूब चर्चा में रहे। 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश देने के लिए गधों के साथ अनोखी रैली निकाली थी। गधों के गले में राजनीतिक तंज वाले संदेशों की तख्तियां लटकी थीं।

वे चुनाव प्रचार के दौरान हाथ में घड़ी-घंट लेकर चलते थे और लोगों को लोकतंत्र व नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करने की कोशिश करते थे। उनकी कलाई पर अक्सर महात्मा गांधी के दौर की घड़ी भी दिखाई देती थी।

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समाजसेवा में भी पीछे नहीं रहे

नागरमल बाजोरिया सिर्फ चुनावों के कारण ही चर्चा में नहीं रहे। जरूरतमंद परिवारों की मदद करना और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए काम करना भी उनकी पहचान का हिस्सा था। उन्होंने कई जगह अपने खर्च से हैंडपंप लगवाए। गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में भी आर्थिक मदद की।

1930 में लाहौर में जन्मे बाजोरिया का परिवार आजादी और देश के बंटवारे से पहले भागलपुर आकर बस गया था। इसके बाद भागलपुर ही उनकी कर्मभूमि बन गया। उन्होंने अपना अंतिम चुनाव 2019 में लड़ा था।

Location :  Bhagalpur

Published :  4 September 2026, 2:54 PM IST

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