
तेजस्वी की ट्रिपल स्ट्राइक से बैकफुट पर एनडीए (Img- Pinterest)
Patna: बिहार की राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर कोई नया नहीं है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस बार एक ऐसे मुद्दे पर हाथ डाला है जिसने एनडीए खेमे में हलचल तेज कर दी है।
हाल ही में संगठन को भंग कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे तेजस्वी ने 9 साल पुराने बहुचर्चित 'सृजन घोटाले' के जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया है। 'रणछोड़' के आरोपों से घिरे तेजस्वी ने इस मुद्दे के जरिए अचानक आक्रामक वापसी की है और एक तीर से सीधे तीन बड़े सियासी शिकार कर डाले हैं।
सृजन घोटाला भागलपुर जिले का एक बड़ा वित्तीय गबन का मामला है, जिसमें 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति' नाम के एनजीओ के जरिए सरकारी खातों का पैसा अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया। फर्जी पासबुक और बैंक कर्मियों व अफसरों की साठगांठ से यह खेल वर्षों तक चला।
यद्यपि सीबीआई जांच के दौरान पटना की विशेष अदालत ने कुछ बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को सजा भी सुनाई और मुख्य आरोपी रजनी प्रिया की गिरफ्तारी हुई, लेकिन मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट और मुख्य साजिशकर्ताओं का खुलासा अभी भी अधूरा है।
तेजस्वी यादव का यह कदम महज़ एक बयानबाजी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। सीबीआई जांच की धीमी रफ्तार को मुद्दा बनाकर वे सीधे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, यह घोटाला नीतीश कुमार के सुशासन के दावों पर सबसे बड़ा दाग रहा है, इसलिए नीतीश सरकार को सीधे जनता के कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसके साथ ही, राज्य में भाजपा के बढ़ते दबदबे और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को भी घेरने की पूरी तैयारी है।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि 9 साल पहले उजागर हुए 5500 करोड़ रुपये के इस घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री के चहेतों, मंत्रियों और अफसरों ने खजाने को लूटा था।
उनका आरोप है कि भाजपा और सत्तापक्ष के बड़े नेताओं को बचाने के लिए जांच एजेंसियों ने मामले पर 'मिट्टी डाल दी'। तेजस्वी के अनुसार, केंद्र और राज्य की वाशिंग मशीन में डुबकी लगाकर बड़े गुनहगार आज भी आराम फरमा रहे हैं।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सीबीआई अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं करती और मुख्य गुनहगारों का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक यह मुद्दा प्रासंगिक रहेगा। तेजस्वी यादव ने सीबीआई की इसी ढिलाई को अपना सबसे धारदार राजनीतिक हथियार बना लिया है। आगामी चुनावों से पहले सृजन घोटाले को ढाल बनाकर तेजस्वी बिहार की सियासत में अपनी स्थिति और मजबूत करने के मूड में हैं।
Location : Patna
Published : 10 August 2026, 12:32 PM IST