स्कॉटलैंड के बीच विला में तीन दिन बिताने वाले भारतीय कंटेंट क्रिएटर का वीडियो वायरल हो रहा है। 2 लाख खर्च के बावजूद सुविधाओं की कमी और भारत-ब्रिटेन की मेहमाननवाजी के फर्क ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।

स्कॉटलैंड बीच विला का अनुभव बना चर्चा का विषय
New Delhi: स्कॉटलैंड के एक बीच विला में तीन दिन बिताने वाले एक भारतीय यात्री का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कंटेंट क्रिएटर दीपांशु ने ब्रिटेन और भारत के आतिथ्य सत्कार यानी मेहमाननवाजी के बीच के फर्क को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से बताया है। उनका अनुभव लाखों लोगों से जुड़ता नजर आ रहा है।
दीपांशु ने बताया कि उन्होंने स्कॉटलैंड में तीन दिन के प्रवास के लिए करीब 2 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कमरे की सफाई, तौलिया बदलने और कपड़े धोने जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। उनके मुताबिक, भारत में चाहे होटल हो या होमस्टे, मेहमानों को इन चीजों के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर nomadicdipanshu नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “ब्रिटेन की मेहमाननवाजी आपको आत्मनिर्भर बनाती है, जबकि भारतीय मेहमाननवाजी आपको यह एहसास कराती है कि आपकी वास्तव में देखभाल की जा रही है।” पोस्ट को एक लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
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दीपांशु ने बताया कि तीन दिन के प्रवास के दौरान एक बार भी हाउसकीपिंग सेवा नहीं दी गई। जब उन्होंने तौलिया बदलने के लिए रिसेप्शन पर फोन किया तो पूरे दिन कोई जवाब नहीं मिला। अंत में रिसेप्शन तक पैदल जाने पर उन्हें तौलिया खुद धोने और दोबारा इस्तेमाल करने के लिए वॉशिंग मशीन का उपयोग करने को कहा गया।
वीडियो में दीपांशु यह भी बताते हैं कि यूके में एक दिन अचानक गर्म पानी आना बंद हो गया। न तो कोई पहले से सूचना दी गई और न ही किसी तरह की माफी मांगी गई। इसके विपरीत, भारत में अगर ऐसी कोई समस्या आती है तो स्टाफ तुरंत समाधान करने की कोशिश करता है और माफी भी मांगता है।
दीपांशु का मानना है कि दोनों देशों में आतिथ्य सत्कार की परिभाषा ही अलग है। पश्चिमी देशों में मेहमानों से आत्मनिर्भर होने की अपेक्षा की जाती है, जबकि भारत में मेहमान को भगवान समान माना जाता है और उनकी हर जरूरत का ध्यान रखा जाता है।
इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रियाएं दी हैं। ज्यादातर लोग इस बात से सहमत दिखे कि भारतीय और एशियाई देशों का आतिथ्य सत्कार पश्चिमी देशों से कहीं बेहतर है। एक यूजर ने लिखा कि भारतीय मेहमाननवाजी का कोई मुकाबला नहीं है। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि पूरे यूके की यात्रा के बाद यह तुलना बिल्कुल सटीक लगती है।
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि अगर भारत अपने पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को और बेहतर कर ले, तो दुनिया में आतिथ्य सत्कार के क्षेत्र में उसकी कोई बराबरी नहीं होगी।