बनारस के गंगा घाट पर आधी रात पंडितों द्वारा गाया गया दर्द भरा ग़ज़ल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राहत फतेह अली खान के गीत ने घाट की खामोशी में ऐसा सुकून घोला कि लोग इसे ‘दर्द की इबादत’ बता रहे हैं।

पंडितों की ग़ज़ल ने मोहा दिल (Img- Internet)
Banaras: यूपी के बनारस को यूं ही मुक्ति की नगरी नहीं कहा जाता। माना जाता है कि यहां आने वाला हर इंसान किसी न किसी तलाश में होता है कोई मोक्ष की, कोई शांति की, तो कोई खुद से मिलने की। इसी विश्वास को सच साबित करता यह वीडियो, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बनारस के गंगा घाट पर आधी रात का एक अद्भुत और भावनात्मक नजारा देखने को मिलता है।
वीडियो में रात करीब दो बजे का समय है। चारों ओर गहरा सन्नाटा, गंगा की हल्की लहरों की सरसराहट, घाट पर जलते छोटे-छोटे दीये और उसी बीच कुछ पंडित शांत भाव से बैठे नजर आते हैं। न कोई मंच, न कोई माइक और न ही कोई भीड़। बस खुले आसमान के नीचे सुर, शब्द और एहसास की गहराई।
घाट पर बैठे पंडित पूरी तन्मयता और भावुकता के साथ राहत फतेह अली खान का मशहूर गाना “मोहब्बत में दग़ा की थी, सो काफ़िर थे, सो काफ़िर हैं…” गाते दिखाई दे रहे हैं। उनकी आवाज में न कोई बनावट है और न ही प्रदर्शन का भाव, बल्कि यह गायन मानो आत्मा से निकली इबादत जैसा लगता है। गाने का दर्द घाट की खामोशी में घुलकर और गहरा हो जाता है।
दिन के समय जहां बनारस के घाटों पर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और चहल-पहल का माहौल रहता है, वहीं रात में घाटों पर एक अलग ही दुनिया बसती है। उस सुकून भरे माहौल में जब यह ग़ज़ल गूंजती है, तो सुनने वाला खुद-ब-खुद उस दर्द से जुड़ जाता है। यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि टूटे भरोसे, अधूरी मोहब्बत और जिंदगी की सच्चाइयों की अभिव्यक्ति है।
वीडियो देखने वाले लोग इसे किसी फिल्मी सीन से कम नहीं बता रहे हैं। बिना किसी कृत्रिम व्यवस्था के, सिर्फ सुर और भाव के सहारे रचा गया यह दृश्य बनारस की आत्मा को दर्शाता है। पंडितों का गायन ऐसा लगता है जैसे यह उनका रोज़ का साधना कर्म हो, जिसमें संगीत और भक्ति का सुंदर संगम नजर आता है।
यह भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम पर @priyamalviya नाम की यूजर ने इसे शेयर किया है। अब तक इस वीडियो को करोड़ों लोग देख चुके हैं और लाखों की संख्या में लाइक मिल चुके हैं। लोग कमेंट सेक्शन में अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कर रहे हैं।
फतेहपुर में लगातार चोरियां, वायरल वीडियो और खामोश पुलिस- क्या है पूरा सच?
कमेंट्स में एक यूजर ने लिखा, “ये बनारस है, यहां दर्द भी इबादत बन जाता है।” वहीं दूसरे ने कहा, “ये गाना नहीं, टूटे दिल की आरती है।” कई लोगों ने बताया कि यह वीडियो उनकी पुरानी यादों को ताजा कर गया और दिल को छू गया।
यह वीडियो एक बार फिर साबित करता है कि बनारस सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक एहसास है। यहां संगीत, दर्द, भक्ति और शांति सब एक साथ मिलकर इंसान को खुद से मिलने का मौका देते हैं।