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New Delhi: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामने वाले 20 बागी सांसदों के गुट में अब एक और बड़ी दरार के संकेत मिल रहे हैं। कोलकाता के एक होटल में सुदीप बंद्योपाध्याय द्वारा बुलाई गई रणनीति बैठक में जब 10 बड़े सांसद नदारद रहे, तो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या ये सांसद अब अपनी बगावत से पीछे हटने की सोच रहे हैं?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से दल-बदल विरोधी कानून के तहत जारी अयोग्यता नोटिस का जवाब देने की समय-सीमा गुरुवार को खत्म हो चुकी है, जिसके बाद बागी खेमे की उलझनें बढ़ गई हैं।
सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठक में शामिल न होने वाले काकोली घोष दस्तीदार, सयानी घोष, यूसुफ पठान, माला रॉय, जून मालिया और देव जैसे दिग्गजों के दिमाग में संसद सदस्यता रद्द होने का गहरा डर बैठ गया है। यदि लोकसभा अध्यक्ष उनकी सदस्यता रद्द कर देते हैं, तो उनका राजनीतिक करियर अधर में लटक सकता है।
यही वजह है कि ये सांसद अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ नेता पर्दे के पीछे से वापस टीएमसी नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाने या कानूनी दांव-पेच के जरिए समय बिताने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह उनकी सांसदी बच सके।
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आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बागी सांसदों की उस मांग पर क्या फैसला लेते हैं, जिसमें उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा है। यदि स्पीकर कार्यालय इस मांग को खारिज कर देता है, तो इन सांसदों पर अयोग्यता की तलवार तुरंत गिर सकती है।
वहीं, अगर समय बढ़ा दिया जाता है, तो इन दो हफ्तों में बागी गुट में और बड़ा बिखराव देखने को मिल सकता है। जो 10 सांसद बैठक से दूर रहे, वे व्यक्तिगत रूप से अपना कानूनी पक्ष रख सकते हैं या फिर इस बागी गुट से खुद को पूरी तरह अलग कर सकते हैं। आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
Location : New Delhi
Published : 9 October 2026, 4:26 PM IST
Topics : Political News Speaker Om Birla TMC TMC Rebel MPs