मसूरी के जबरखेत मॉडल से चमकेगा उत्तराखंड का पर्यटन, वन विभाग विकसित करेगा आठ नए डेस्टिनेशन

उत्तराखंड सरकार मसूरी के जबरखेत मॉडल पर आठ वन क्षेत्रों को ईको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने जा रही है। इससे पर्यटकों को प्रकृति के बीच नया अनुभव मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। जानिए इन खास जगहों और बजट के बारे में।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 19 July 2026, 3:04 PM IST

Dehradun: उत्तराखंड सरकार राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पहाड़ों की रानी मसूरी के पास निजी प्रयासों से बने सफल 'जबरखेत नेचर रिजर्व' की तर्ज पर अब सरकारी स्तर पर भी ईको टूरिज्म हब विकसित किए जाएंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देशों के बाद वन विभाग ने राज्य के आठ अलग-अलग वन क्षेत्रों को इस मॉडल पर तैयार करने का फैसला किया है।

क्या है सरकार का विजन और योजना?

उत्तराखंड का लगभग 71.05 प्रतिशत भूभाग जंगलों से घिरा हुआ है। सरकार की योजना है कि प्रकृति को बिना कोई नुकसान पहुंचाए इन वन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाया जाए। मुख्य सचिव ने वन विभाग की एक समीक्षा बैठक में जबरखेत मॉडल की सफलता का जिक्र करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए थे। जबरखेत में निजी भागीदारी से बना मॉडल देश-विदेश के पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है। इसी को देखते हुए अब सरकार खुद ऐसे आठ स्थलों को संवारने जा रही है, जिनके पास पहले से वन विश्राम गृह (फॉरेस्ट रेस्ट हाउस) मौजूद हैं।

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पर्यटकों को मिलेंगी ये सुविधाएं, स्थानीय लोगों को रोजगार

मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो के मुताबिक, विभाग ने जबरखेत मॉडल का पूरा अध्ययन कर लिया है और अब चुनिंदा जगहों के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन सभी आठ ईको टूरिज्म हब्स में पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग और बर्ड वाचिंग (पक्षियों को देखना) जैसी रोमांचक गतिविधियां शुरू की जाएंगी। इस पहल का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को होगा। यहां के युवाओं को गाइड के रूप में काम मिलेगा और होम स्टे के जरिए आजीविका के नए साधन उपलब्ध होंगे।

इन आठ जगहों पर खर्च होंगे लाखों रुपये

वन विभाग ने जिन आठ स्थलों को ईको टूरिज्म हब के लिए चुना है, उनके लिए प्रस्तावित बजट भी तय कर दिया गया है-

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नैना-किलबरी (नैनीताल): 60 लाख रुपये

बिनसर (अल्मोड़ा): 65 लाख रुपये

बिनोग (मसूरी): 60 लाख रुपये

रोशलीखाल-खुरैत सौड़ (नरेंद्रनगर): 85 लाख रुपये

महेशखान (नैनीताल): 35 लाख रुपये

नीरगाड-कुंजापुरी (नरेंद्रनगर): 35 लाख रुपये

गंगोत्री पांडव गुफा (उत्तरकाशी): 33 लाख रुपये

कौड़िया (नई टिहरी): 30 लाख रुपये

इस नई योजना से न सिर्फ सैलानियों को प्रकृति की गोद में शांति और सुकून का एक नया अहसास मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

Location :  Dehradun

Published :  19 July 2026, 3:04 PM IST