पुलिस की वर्दी छोड़ साधना में लीन हुए उस संत की गाथा, जिनकी तपस्या से नीम करौली महाराज भी थे प्रभावित

एक पुलिस अधिकारी से सिद्ध साधु बने उस तपस्वी की अनसुनी कहानी, जिनकी आध्यात्मिक शक्ति से नीम करौली महाराज भी प्रभावित थे। उनके तप ने कैंची धाम की पवित्रता को नई पहचान दी और हिमालय की इस भूमि को दिव्य ऊर्जा से भर दिया।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 22 January 2026, 2:17 PM IST

Nainital: नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आज विश्वभर में श्रद्धा का प्रतीक बन चुका है। बाबा नीम करौली महाराज के कारण यह स्थान अध्यात्म का केंद्र माना जाता है, लेकिन इस भूमि की आध्यात्मिक धारा बहुत पहले ही प्रवाहित हो चुकी थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस धाम की पवित्रता की नींव एक ऐसे संत ने रखी थी, जिन्होंने उच्च पद और प्रतिष्ठा छोड़कर जीवन को साधना के लिए समर्पित कर दिया। उनकी कहानी धाम की गहराई और आध्यात्मिक इतिहास को एक नई रोशनी में दिखाती है।

कहा जाता है कि हिमालय में एक ऐसे साधु रहते थे जिनका ज्यादातर समय मौन तपस्या में बीत गया था। उनकी दिनचर्या में बोलना भी एक साधना का हिस्सा था, और सप्ताह में केवल एक दिन ही अपनी वाणी का प्रयोग करते थे। लोगों ने उन्हें इसी विशेष तपस्वरूप के कारण सोमवारी बाबा कहना शुरू कर दिया। उनका जीवन भटकते हुए साधकों जैसा था घने जंगलों में, पहाड़ी पगडंडियों पर, और उन गुफाओं में जहां केवल शांति और प्रकृति की ध्वनि उनका साथ देती थी। उनकी तपस्या और आभा से प्रभावित होकर दूर-दराज़ के क्षेत्रों से श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आते थे।

इतिहासकार डॉ. अजय रावत बताते हैं कि उनका प्रमुख आश्रम भीमताल के पास पदमपुरी में स्थित है, जहां आज भी उनकी साधना की ऊर्जा महसूस की जा सकती है। पदमपुरी के अलावा काकड़ीघाट में भी उनका एक स्थान है, जहां सोमवार के दिन नियमित रूप से भंडारा आयोजित होता था। कहा जाता है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक अद्भुत शांति का अनुभव होता था, मानो चारों ओर फैली हवा भी उनकी तपस्या की साक्षी था

बता दें कि उनका जन्म 1860 पंजाब में हुआ था। पिता न्याय विभाग में कार्यरत थे और पढ़ाई-लिखाई भी वहीं पूरी हुई। युवावस्था में उन्होंने पुलिस सेवा में कदम रखा और ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचान बनाई। लेकिन उनके भीतर कहीं न कहीं अध्यात्म का प्रकाश पहले से जल रहा था। समय के साथ एक ऐसी घटना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी, जिसने उन्हें सांसारिक जीवन से विरक्त कर साधना की राह पर आगे बढ़ा दिया।

यह कथा सिर्फ एक संत की नहीं, बल्कि उस आध्यात्मिक यात्रा की है जिसने आगे चलकर कैंची धाम की पवित्रता को और भी गहराई दी।

Location : 
  • Nainital

Published : 
  • 22 January 2026, 2:17 PM IST