Uttarakhand News: नेपाली गीत से फिर गरमाया सीमा विवाद, टनकपुर और अल्मोड़ा को नेपाल का हिस्सा बताने पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर वायरल एक नेपाली गीत में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधूरा के साथ टनकपुर और अल्मोड़ा को भी नेपाल का हिस्सा बताया गया है। गीत के बाद सीमा विवाद को लेकर नई बहस शुरू हो गई है और लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 June 2026, 2:40 PM IST

Pithoragarh : भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह कोई राजनीतिक बयान या सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा एक नेपाली गीत है। इस गीत में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधूरा के साथ-साथ उत्तराखंड के टनकपुर और अल्मोड़ा को भी नेपाल का हिस्सा बताया गया है। गीत के वायरल होने के बाद दोनों देशों के लोगों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

गीत की पंक्तियों ने खींचा लोगों का ध्यान

वायरल हो रहे गीत की पंक्तियां "हमरै हो लिपुलेख, हमरै हो कालापानी, हमरै हो टनकपुर, अल्मोड़ा" इंटरनेट पर व्यापक रूप से साझा की जा रही हैं। खास तौर पर टनकपुर और अल्मोड़ा का उल्लेख लोगों के लिए हैरानी का विषय बना हुआ है, क्योंकि इन क्षेत्रों को लेकर भारत और नेपाल के बीच कोई आधिकारिक सीमा विवाद नहीं है। ऐसे में गीत में इन स्थानों का नाम शामिल होने से नई चर्चाओं को हवा मिल गई है।

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क्या है भारत-नेपाल सीमा विवाद?

भारत और नेपाल के बीच मुख्य सीमा विवाद कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा क्षेत्र को लेकर है। नेपाल का दावा है कि महाकाली (काली) नदी का वास्तविक उद्गम लिंपियाधूरा में है और सुगौली संधि के अनुसार नदी के पूर्व का पूरा क्षेत्र नेपाल का हिस्सा होना चाहिए। वहीं भारत इन क्षेत्रों को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का अभिन्न हिस्सा मानता है और यहां लंबे समय से प्रशासनिक नियंत्रण बनाए हुए है।

2020 में बढ़ा था विवाद

वर्ष 2020 में भारत द्वारा लिपुलेख तक सड़क निर्माण किए जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया था। इसके जवाब में नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा को अपने भूभाग में दर्शाया था। भारत ने उस नक्शे को एकतरफा कदम बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हुई।

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विशेषज्ञों ने जताई चिंता

राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि सांस्कृतिक माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित ऐसे संदेश जनभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। सीमा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह की सामग्री दोनों देशों के नागरिकों के बीच बहस और विवाद को बढ़ा सकती है। फिलहाल इस वायरल गीत पर भारत या नेपाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हालांकि, टनकपुर और अल्मोड़ा का नाम गीत में शामिल होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

Location :  Pithoragarh

Published :  5 June 2026, 2:40 PM IST