विद्युत संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर विकासनगर क्षेत्र में बिजली कर्मचारियों ने गेट मीटिंग और जुलूस निकालकर विरोध जताया। डाकपत्थर मुख्यालय में कर्मचारियों ने सरकार से बिल वापस लेने, भूमि हस्तांतरण आदेश रद्द करने और लंबित 19 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।

बिजली कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन
Dehradun: उत्तराखंड़ में देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर बिजली कर्मचारियों ने विद्युत संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन कार्यक्रम के तहत यमुना घाटी क्षेत्र की कई जल विद्युत परियोजनाओं और संस्थानों में गेट मीटिंग आयोजित की गई।
सुबह करीब 10 बजे से ईछाडी डैम, डाकपत्थर बैराज, खोदरी पावर हाउस, विद्युत भवन लखवाड़, प्रोजेक्ट डिस्ट्रीब्यूशन डिविजन, ढकरानी पावर हाउस, ढालीपुर पावर हाउस, कुल्हाल पावर हाउस और जुड्डो डैम सहित कई स्थानों पर कर्मचारियों ने विरोध सभाएं कीं।
इस दौरान बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर सरकार के प्रस्तावित कानून के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने कहा कि प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे सार्वजनिक बिजली व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
आंदोलन के तहत शाम करीब 4 बजे डाकपत्थर मुख्यालय में बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने एक विशाल जुलूस निकाला। इस जुलूस में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने विरोध को दर्ज कराया।
सभा की अध्यक्षता इंजीनियर अभिलाष यादव ने की, जबकि संचालन संजय राणा द्वारा किया गया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पारित कराने की प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता व्यक्त की।
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मोर्चा के संयोजक गोपाल बिहारी और संजय राणा ने कहा कि बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसान संगठनों और उपभोक्ता समूहों द्वारा इस बिल पर कई आपत्तियां और सुझाव दिए गए हैं, लेकिन सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के इसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने बिल को जबरन लागू करने का प्रयास किया तो बिजली कर्मचारी बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
बिजली कर्मचारियों ने केवल विद्युत संशोधन अधिनियम 2025 का ही विरोध नहीं किया, बल्कि राज्य सरकार द्वारा डाकपत्थर और ढालीपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं की करीब 76.73 हेक्टेयर भूमि निजी क्षेत्र को देने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया। मोर्चा के नेताओं का कहना है कि इस भूमि का अन्य उद्देश्यों के लिए हस्तांतरण करने से लखवाड़, किशाऊ और यमुना बेसिन की महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं के विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने ऊर्जा निगमों में पिछले चार वर्षों से लंबित कार्मिकों की 19 सूत्रीय मांगों को भी जल्द पूरा करने की मांग की। मोर्चा ने बताया कि इन मांगों को लेकर पहले भी प्रबंधन को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो 13 और 17 मार्च को गेट मीटिंग के जरिए विरोध जारी रहेगा। इसके बाद 27 मार्च को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर एकदिवसीय सत्याग्रह और 6 अप्रैल को उत्तराखंड जल विद्युत निगम मुख्यालय पर भी सत्याग्रह किया जाएगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद भी सरकार और प्रबंधन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो बिजली कर्मचारी मध्यरात्रि से पूर्ण हड़ताल करने के लिए भी बाध्य होंगे।