
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Nainital: बाबा नीम करौली महाराज का नाम आज केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में श्रद्धा और विश्वास के साथ लिया जाता है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम उनके प्रमुख आश्रमों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कैंची धाम की एक खास परंपरा कंबल चढ़ाने की भी है। यहां आने वाले भक्त बाबा को कंबल अर्पित करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत आखिर कैसे हुई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कथा वर्ष 1943 से जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि एक बार बाबा नीम करौली महाराज अचानक एक वृद्ध दंपति के घर पहुंचे और वहां रात बिताने की इच्छा जताई। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद दंपति ने पूरी श्रद्धा और प्रेम से उनका स्वागत किया, भोजन कराया और ओढ़ने के लिए एक कंबल दिया।
कहा जाता है कि रातभर बाबा उसी कंबल को ओढ़े रहे। सुबह होते ही उन्होंने वह कंबल दंपति को लौटाते हुए कहा कि इसे बिना खोले गंगा में प्रवाहित कर देना। बाबा की आज्ञा मानते हुए दंपति कंबल लेकर गंगा की ओर चल पड़े। रास्ते में उन्हें महसूस हुआ कि कंबल का वजन असामान्य रूप से बढ़ गया है, मानो उसके भीतर कोई भारी वस्तु हो। इसके बावजूद उन्होंने कंबल को खोला नहीं और गंगा में प्रवाहित कर दिया।
कुछ दिनों बाद उनका बेटा, जो ब्रिटिश सेना में भर्ती था और उस समय बर्मा के युद्ध क्षेत्र में तैनात था, सकुशल घर लौट आया। बेटे ने बताया कि जिस रात बाबा उनके घर ठहरे थे, उसी रात वह दुश्मनों से घिर गया था। चारों ओर से गोलियां चल रही थीं और उसके कई साथी मारे गए, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसे एक भी गोली नहीं लगी और उसकी जान बच गई।
इस घटना के बाद दंपति को विश्वास हो गया कि बाबा द्वारा ओढ़ा गया वही कंबल उनके बेटे की रक्षा का कारण बना। मान्यता है कि इसी घटना के बाद कैंची धाम में कंबल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई। समय के साथ यह परंपरा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बन गई और आज भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा को कंबल चढ़ाते हैं।
कैंची धाम आने वाले श्रद्धालु कंबल अर्पित करने के बाद उसे बाबा के चरणों से स्पर्श कराकर वापस अपने साथ ले जाते हैं। कई लोग उस कंबल को घर के पूजा स्थल में रखते हैं, जबकि कुछ विशेष अवसरों पर उसे शुभ मानकर उपयोग करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यह कंबल बाबा के आशीर्वाद और संरक्षण का प्रतीक होता है।
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स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कैंची धाम में कंबल चढ़ाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि बाबा नीम करौली महाराज के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से बाबा को याद करने और श्रद्धा के साथ कंबल अर्पित करने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले हजारों भक्त इस परंपरा को निभाते हुए बाबा के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हैं। बाबा नीम करौली महाराज से जुड़ी यह कहानी आज भी भक्तों के बीच विश्वास, भक्ति और चमत्कार की एक मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।
Location : Nainital
Published : 10 June 2026, 8:18 PM IST