देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उबर के संचालन के विरोध में प्रीपेड टैक्सी मालिक एवं चालक समिति यूनियन ने प्रदर्शन किया। यूनियन ने आरोप लगाया कि ऐप आधारित सेवाओं से स्थानीय चालकों का रोजगार प्रभावित हो रहा है और समान नियम लागू करने की मांग की।

टैक्सी यूनियन का प्रदर्शन
Dehradun: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा पर उबर ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन के विरोध में स्थानीय प्रीपेड टैक्सी मालिक एवं चालक समिति यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन पदाधिकारी और चालक एयरपोर्ट परिसर के बाहर एकत्र हुए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
यूनियन के संरक्षक गुलाब सिंह ने कहा कि बाहरी कंपनियों के प्रवेश से स्थानीय टैक्सी चालकों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि ऐप आधारित कंपनियां नियमों में ढील का लाभ उठाकर कारोबार कर रही हैं, जबकि स्थानीय टैक्सी संचालकों पर सख्त नियम लागू किए जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जब तक सभी के लिए समान नियम और शर्तें लागू नहीं होतीं, तब तक Uber के संचालन पर रोक लगाई जाए।
प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित उनियाल ने मौके पर पहुंचकर यूनियन की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्थानीय युवाओं और टैक्सी चालकों के हितों की रक्षा करे। यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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यूनियन सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से स्थानीय चालक अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे में बाहरी कंपनियों को बढ़ावा देना उनके साथ अन्याय है।
एयरपोर्ट परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने यूनियन प्रतिनिधियों से बातचीत की और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि सभी पक्षों की बात सुनकर नियमों के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है।
इस दौरान संरक्षक गुलाब सिंह केंद्र, अध्यक्ष संजय सिंधवाल, उपाध्यक्ष मदन सिंह, सचिव चंद्र किशोर उनियाल, विजय सहित यूनियन सदस्य सतीश तिवारी, नारायण चौधरी, अर्जुन, मनोज, दीपक और अन्य चालक मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर स्थानीय हितों की रक्षा की बात कही।
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यह मामला एक बार फिर पारंपरिक टैक्सी सेवाओं और ऐप आधारित कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को उजागर करता है। जहां एक ओर तकनीक आधारित सेवाएं यात्रियों को सुविधा प्रदान कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय संचालकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन का फैसला इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।