मां शीतला के दर्शनों से चर्म रोग होगा छूमंतर, जानिए मंदिर की आस्था से जुड़ी ये कहानी

काठगोदाम की ऊंची पहाड़ी पर स्थित मां शीतला का प्राचीन मंदिर नैनीताल जिले का प्रमुख आस्था केंद्र है। मान्यता है कि यहां श्रद्धा से चर्म रोग दूर होते हैं और मां की कृपा हर भक्त की मनोकामना पूरी करती है। जानिए मंदिर का इतिहास और कथा ।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 10 March 2026, 3:53 AM IST

Nainita: जिले की पहाड़ियों में बसे अनेक प्राचीन धार्मिक स्थल लोगों की अटूट श्रद्धा के केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं आस्था स्थलों में से एक प्रसिद्ध शक्ति पीठ का उल्लेख आज हम कर रहे हैं, जिसे स्थानीय लोग मां शीतला के पावन धाम के रूप में जानते हैं। नैनीताल ज़िले के हल्द्वानी क्षेत्र में काठगोदाम की ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर सदियों से भक्तों की आस्था का आधार बना हुआ है।

मां शीतला का यह प्राचीन मंदिर आसपास के गांवों और शहरों के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मां को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और श्रद्धालु दूर दूर से यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं। त्यौहारों और विशेषकर नवरात्रों के दौरान यहां भक्तों की लंबी कतारें देखी जाती हैं।

माता शीतला को रोग निवारण की देवी माना जाता है। शीतला माता, मां पार्वती का ही दूसरा स्वरूप हैं। शीतला माता को आरोग्य और स्वच्छता की देवी कहा गया है। माना जाता है कि यहां की शांत और पवित्र वातावरण से भक्तों को अध्यात्मिक सुकून मिलता है। लोकमान्यता के अनुसार मां शीतला बच्चों को चर्म संबंधित रोगों से रक्षा करने वाली देवी भी मानी जाती हैं।

मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष सचिन शाह बताते हैं कि यहां आने वाले लोगों का विश्वास बेहद गहरा है और जो भी भक्त पूरी श्रद्धा से अपनी प्रार्थना करता है, मां उसकी मनोकामना जरूर सुनती हैं। नवरात्र उत्सव के दौरान तो लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और मां के दरबार में हाज़िरी लगाते हैं।

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ये है रोचक कथा

मंदिर को लेकर एक रोचक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि भीमताल क्षेत्र के पांडे परिवार के लोग अपने गांव में मां शीतला का मंदिर स्थापित करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से वे बनारस से देवी की प्रतिमा लेकर वापस लौट रहे थे। जब वे इस पहाड़ी स्थान पर पहुंचे तो रात हो चुकी थी और सभी ने यहीं विश्राम करने का निर्णय लिया। जनश्रुति के अनुसार रात में एक व्यक्ति को मां ने सपने में दर्शन दिए और प्रतिमा को इसी स्थान पर स्थापित करने का संकेत दिया।

अगले दिन जब उन्होंने यह बात अपने साथियों को बताई तो पहले तो किसी ने विश्वास नहीं किया, लेकिन जैसे ही प्रतिमा को आगे ले जाने का प्रयास किया गया, वह हिल भी नहीं पाई। इसे दिव्य संकेत मानते हुए सभी ने प्रतिमा को वहीं स्थापित कर दिया। तब से यह स्थान धार्मिक महत्व का केंद्र बन गया है और विशेषकर नवरात्र में यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।

नंदा बल्लभ बताते हैं कि शीतला देवी मंदिर के ठीक नीचे एक अस्पताल स्थित था, जहां चेचक और प्लेग के मरीजों का इलाज होता था, लेकिन तब चेचक और प्लेग की बीमारी लाइलाज होने के कारण मरीजों को इन बीमारियों से मुक्ति नहीं मिल पा रही थी. तब  मरीज और उनके परिजन मां के दर्शन के लिए इस मंदिर में आने लगे और 20 दिनों के अंदर ही काफी मरीजों को इस लाइलाज बीमारी से मुक्ति मिल गई थी

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ऐसे पहुंचें शीतला माता मंदिर

हल्द्वानी शहर से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर पैदल मार्ग और सड़क मार्ग दोनों से जुड़ा हुआ है। हल्द्वानी का निकटतम रेलवे स्टेशन भी काठगोदाम में ही है, जो मंदिर से लगभग उतनी ही दूरी पर पड़ता है। बस सेवाओं और निजी वाहनों के माध्यम से हल्द्वानी का संपर्क प्रदेश के बड़े शहरों से सुगमता से बना हुआ है।

Location : 
  • नैनीताल

Published : 
  • 10 March 2026, 3:53 AM IST