बदरीनाथ मंदिर फंड का वो सीक्रेट, जिसे लेकर हेमंत द्विवेदी ने गणेश गोदियाल को सीधे धाम पर बुलाया!

बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस्तीफा देने से साफ मना करते हुए कांग्रेस को घेरा। जानिए 2012 के उन अवैध फंड ट्रांसफर और रोस्टर के खेल की पूरी कहानी, जिसने इस बहस को धाम तक पहुंचा दिया।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 15 July 2026, 4:44 PM IST

Dehradun: चारधाम आस्था के सबसे बड़े केंद्र बदरीनाथ में हुए कथित चढ़ावा घोटाले ने अब एक अभूतपूर्व राजनीतिक कुरुक्षेत्र का रूप ले लिया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में कूटनीतिक चुप्पी या इस्तीफे का जो चलन देखा जाता है, बीकेटीसी (बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने उसे पूरी तरह पलट दिया है।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संदर्भों को सिरे से खारिज करते हुए द्विवेदी ने साफ कर दिया कि वह 'चंपत राय मॉडल' पर इस्तीफा देने वाले नहीं हैं। बल्कि उन्होंने इस विवाद को एक नया मोड़ देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को सीधे बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की पवित्र धरती पर आकर फाइलों के साथ आमने-सामने की बहस करने की खुली चुनौती दे दी है।

2012 की फाइलें और अवैध नियुक्तियों का वो पुराना जाल

यह लड़ाई सिर्फ एक मौजूदा कर्मचारी के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे फाइलों का एक ऐसा चक्रव्यूह है जो साल 2012 तक जाता है। द्विवेदी ने एक बड़ा रणनीतिक हमला करते हुए खुलासा किया है कि जिस कर्मचारी पर उंगली उठ रही है, उसकी नींव दरअसल 2014 की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय ही रखी गई थी।

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नियमों को ताक पर रखकर पद स्वीकृत करने से लेकर इंटरनेट कोऑर्डिनेटर जैसे पदों पर मनमाना ग्रेड-पे देने का यह खेल पुराना है। वर्तमान प्रशासन का तर्क है कि इस पूरे मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जबकि मुख्य निशाना उस व्यवस्था को ठीक करना है जिसकी शुरुआत सालों पहले हुई थी।

फंड ट्रांसफर का वो खेल, जो कोरम के बिना खेला गया?

इस विवाद का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बात सिर्फ चढ़ावे की चोरी की नहीं है, बल्कि मंदिर की उस पवित्र निधि (फंड) की है जिसे नियमों के विरुद्ध जाकर बांटने का आरोप है। आरोप है कि कांग्रेस के कार्यकाल में बिना आवश्यक कोरम (गणपूर्ति) के बोर्ड बैठकें की गईं और मंदिर के पैसे को विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों, बाहरी जिलों के निर्माण कार्यों और सड़कों के लिए स्वीकृत कर दिया गया।

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हेमंत द्विवेदी ने साफ किया है कि तैनाती अध्यक्ष नहीं बल्कि मुख्य कार्याधिकारी का रोस्टर करता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस 'रोस्टर और कोरम' के नए चक्रव्यूह का क्या जवाब देती है।

Location :  Dehradun

Published :  15 July 2026, 4:44 PM IST