गैरसैण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस और यूकेडी दोनों पार्टियां सत्र के दौरान अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रही हैं, देखना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता क्या फैसला देती है। इन दोनों में से किसी एक को सत्ता में बिठाती है या फिर भाजपा हैट्रिक लगाएगी ?

भाजपा का विकल्प बनने की कोशिश में कांग्रेस और यूकेडी (Image Source: Google)
Gairsain (Chamoli): उत्तराखंड में भाजपा हैट्रिक लगाने के लिए उत्साहित है, जबकि कांग्रेस और क्षेत्रीय संगठन यूकेडी को लगता है कि राज्य की भाजपा सरकार की नीतियों के कारण जनता में भारी रोष है, इसलिए जनता उसे सत्ता से हटाने का मन बना चुकी है। अब सवाल यह है कि यदि जनता ने भाजपा को हटाया, तो विकल्प के तौर पर किसे चुनेगी, कांग्रेस या फिर यूकेडी को? अभी इस सवाल के जवाब के लिए करीब एक साल का इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन फिलहाल दोनों पार्टियां विकल्प बनने की पूरी कोशिश में जुटी हुई हैं।
मंगलवार को आज उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र है। आज आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट और कैग की सात रिपोर्ट सदन पटल पर रखी जाएंगी। इसके साथ ही चार अध्यादेश भी सदन पटल पर रखे जाएंगे। इसके अलावा प्रश्नकाल होगा। कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा का सत्र पांच दिन नहीं, बल्कि 21 दिन चलना चाहिए। करीब 600 प्रश्न विधायकों ने सत्र में उठाने के लिए भेजे हैं। इतने प्रश्नों के लिए पर्याप्त समय चाहिए। सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जंगलचट्टी बैरियर पर कांग्रेसियों ने हंगामा किया। कार्यकर्ताओं ने बैरियर पार करने की कोशिश की। वहीं, भारी पुलिसबल तैनात किया गया है।
इससे पहले हल्द्वानी के आईएसबीटी और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की खामियों व विभिन्न मुद्दों को लेकर गैरसैंण विधानसभा परिसर में हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश कांग्रेसी धरने पर बैठ गए।
दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने अपना दमखम दिखाना शुरू कर दिया। सोमवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का संबोधन शुरू होने के साथ ही कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। राज्यपाल का अभिभाषण शुरू हुआ ही था कि कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
बजट सत्र के पहले दिन क्षेत्रीय संगठन उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भी यह संदेश देने की भरपूर कोशिश की कि जनता के मुद्दों पर लड़ाई लड़ने वाला वह राज्य का एक मात्र संगठन था, है और रहेगा। यूकेडी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी के सवाल पर गैरसैंण में विधानसभा कूच किया। उन्होंने बैरिकेड भी तोड़ डाले। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद कुछ कार्यकर्ता विधानसभा तक पहुंच गए। यूकेडी सत्र के दौरान इस मुद्दे पर आंदोलित रहेगी।
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राजनीतिक पंडितों के मुताबिक यूकेडी की युवा टीम जनता के सवालों पर पिछले कई महीनों से जिस तरह बराबर आंदोलित है, उसका लाभ उसे विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। यूकेडी का बढ़ना कांग्रेस के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कहीं ऐसा न हो कि सत्ता विरोधी आक्रोश का कुछ वोट यूकेडी की तरफ शिफ्ट हो जाए और कांग्रेस को विकल्प के तौर पर जो फायदा मिलना चाहिए, वह पूरी तरह न मिल पाए। ऐसे में विपक्ष के वोट बंटने पर भाजपा हैट्रिक लगा सकती है। यही वजह है कि कांग्रेस गैरसैंण को राजधानी बनाने का मुद्दा भी सत्र के दौरान जोर-शोर से उठाने लगी है। गैरसैंण को राजधानी बनाने का मुद्दा यूकेडी जोर-शोर से उठाती रही है। यहां तक कि गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग सबसे पहले यूकेडी ने ही उठाई थी।