CM योगी का बड़ा ऐलान! UP में 500 GCC सेंटर, 50 लाख करोड़ के निवेश और लाखों नौकरियों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में कहा कि उत्तर प्रदेश में 2030-31 तक 500 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य है। उन्होंने 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव, 10 लाख सरकारी नौकरियों, 25 हजार स्टार्टअप, 96 लाख एमएसएमई इकाइयों और रक्षा उत्पादन सहित इंफ्रास्ट्रक्चर तथा तकनीकी विकास का उल्लेख किया।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 26 October 2026, 8:37 PM IST
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Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश असीमित संभावनाओं वाला प्रदेश है, जो अपनी प्रगति और विकास की गति से दुनिया को जवाब दे रहा है। जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने 2030-31 तक प्रदेश में 500 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने का लक्ष्य सामने रखा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश को निवेश, आधुनिक तकनीक, उद्योग, रोजगार और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं इसके लिए तैयार हैं।

2017 से पहले निवेशक लखनऊ आने से करते थे इनकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग दस वर्ष पहले लखनऊ में जीसीसी समिट आयोजित करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टर समिट कराने की योजना बनी थी, लेकिन एक भी इंडस्ट्री लीडर लखनऊ आने को तैयार नहीं हुआ। निवेशकों ने शहर की खतरनाक छवि का हवाला देते हुए आने से इनकार कर दिया था। इसके बाद निवेश के लिए समिट दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित करनी पड़ी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उस समय प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता, माफिया के वर्चस्व और पॉलिसी पैरालिसिस से थी। जब व्यक्ति सुरक्षित नहीं था, तो पूंजी कैसे सुरक्षित रहती? उनके मुताबिक, अव्यवस्था और अकर्मण्यता ने उत्तर प्रदेश को बीमारू बना दिया था। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम थे, व्यापारियों को सुरक्षा की चिंता रहती थी और महिलाओं तथा बेटियों के लिए भी असुरक्षा का माहौल था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में सूर्यास्त के बाद महिलाएं घर से बाहर निकलने और बेटियां स्कूल जाने में असहज महसूस करती थीं।

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कुछ एमओयू पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें देखकर लोग हंसेंगे। उन्होंने दावा किया कि उस समय अंग्रेजी के ‘OR’ और हिंदी के ‘और’ के बीच का अंतर भी नहीं समझा जाता था।

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20 हजार करोड़ नहीं, दो लाख करोड़ रुपये का रखा लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद इन्वेस्टर समिट की तैयारियों का प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास मंत्री और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त समिट की तैयारी को लेकर उनसे मिले थे। अधिकारियों ने जब ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का नाम और 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश लक्ष्य बताया, तो उन्होंने सवाल किया कि जब लक्ष्य इतना कम है, तो आयोजन का नाम ग्लोबल क्यों रखा गया है।

योगी ने अधिकारियों से कहा कि या तो इसका नाम लखनऊ इन्वेस्टर समिट रखा जाए या फिर लक्ष्य को वैश्विक स्तर का बनाया जाए। अधिकारियों ने उस समय सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश में कौन निवेश करेगा। मुख्यमंत्री ने उन्हें पहले तैयारी करने, नीतियां बनाने और लैंड बैंक तैयार करने का निर्देश दिया। इसके बाद निवेश लक्ष्य की निचली सीमा दो लाख करोड़ रुपये रखने और रोड शो आयोजित करने को कहा गया।

उन्होंने बताया कि पहले इन्वेस्टर समिट में 4.65 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। अब प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं इसके लिए तैयार हैं। प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गई हैं।

साढ़े नौ साल में 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी नौकरी का विज्ञापन जारी होते ही अदालत से स्थगन आदेश आ जाता था। इसके विपरीत, पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार की योजनाओं को लागू करने में उत्तर प्रदेश आज अग्रणी राज्यों में शामिल है।

उनके अनुसार, पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP), प्रति व्यक्ति आय, बजट और महिला कार्यबल की भागीदारी को तीन गुना करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। देश में किसी भी राज्य का सबसे बड़ा बजट उत्तर प्रदेश का है। इसमें दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा है।

योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सड़कों, बिजली, औद्योगिक संस्कृति और आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव था। उन्होंने अपने आश्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले बिजली के लिए हर महीने डीजल पर पांच लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब 24 घंटे बिजली मिलती है और करीब दो लाख रुपये का बिल आता है। इससे हर महीने लगभग तीन लाख रुपये की बचत होती है। उन्होंने इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों में आए बदलाव का उदाहरण बताया।

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एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा यूपी में

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। उनके मुताबिक, प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, सबसे अधिक शहरों में मेट्रो संचालन और 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में लखनऊ और वाराणसी के केवल दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पूरी तरह क्रियाशील थे। अब प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। उत्तर प्रदेश में इनलैंड वाटरवे, देश की पहली रैपिड रेल और आठ हजार से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान भी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति से निकलकर दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचा है। इसी तरह उत्तर प्रदेश भी देश के पिछड़े तीन राज्यों में गिने जाने से निकलकर शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हुआ है।

निवेशकों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस, इंसेंटिव सीधे खाते में

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेशकों से किए गए वादों को पूरा करने की व्यवस्था विकसित की गई है। अब उद्योगपतियों को बुलाकर बताया जाता है कि उनका इंसेंटिव तैयार है और राशि उनके खाते में भेज दी गई है। पहले निवेशकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जबकि अब सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, सेमीकंडक्टर मिशन और एआई मिशन को जिस तेजी से आगे बढ़ाया गया है, वह वर्ष 2014 से पहले अकल्पनीय था। मुख्यमंत्री के अनुसार, भारत दुनिया की जीसीसी कैपिटल के रूप में स्थापित हुआ है और उनके आकलन के मुताबिक, हर दूसरी जीसीसी कंपनी भारत में काम कर रही है।

दो लाख STEM ग्रेजुएट, एआई और रोबोटिक्स पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग, तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा का विस्तार हुआ है। प्रदेश हर वर्ष दो लाख STEM ग्रेजुएट तैयार कर रहा है। STEM में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स शामिल हैं। युवाओं को कौशल, नवाचार और तकनीक से जोड़कर इंडस्ट्री रेडी तथा फ्यूचर टेक्नोलॉजी रेडी वर्कफोर्स तैयार की जा रही है।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, 3डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों का भी विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 25 हजार हो गई है। उन्होंने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विकास का जिक्र करते हुए पिछली सरकार पर निशाना साधा। उनके मुताबिक, अंधविश्वास के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री इन क्षेत्रों में नहीं जाते थे। योगी ने टिप्पणी की कि उन्हें ईश्वर में कम और कुर्सी पर ज्यादा विश्वास था। उन्होंने कहा कि आज नोएडा और ग्रेटर नोएडा आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के हब बन चुके हैं।

जेवर में औद्योगिक विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में 25 हजार हेक्टेयर का लैंड बैंक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में गोलीकांड और अपराध के लिए चर्चित रहे इस क्षेत्र में अब औद्योगिक विकास हो रहा है।

उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा, जेवर’ किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन था। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले इस क्षेत्र में सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही लोगों का बाहर निकलना संभव था और विकास ही ऐसी अव्यवस्था से लोगों को बाहर निकाल सकता था।

योगी ने बताया कि यीडा क्षेत्र में फिल्म सिटी, टॉय पार्क, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, एमएसएमई पार्क, डेटा सेंटर पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली यूनिट का काम भी शुरू हो चुका है।

उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश अचीवर स्टेट बना है। डीरेगुलेशन 1.0 रैंकिंग में भी प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।

'वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया' से रक्षा उत्पादन केंद्र तक

मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले इन्वेस्टर समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की थी।

योगी ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की स्थिति थी और उत्पादन क्षमता कट्टा तथा बम बनाने तक सीमित थी। उनके मुताबिक, आज वही उत्तर प्रदेश रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्च किए जाने के तीन दिन बाद उसी मिसाइल को पाकिस्तान के अंदर दागा गया। उन्होंने बताया कि कोविड कालखंड में डीआरडीओ ने ब्रह्मोस परियोजना के लिए प्रस्ताव दिया था। उत्तर प्रदेश ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए परियोजना के लिए मुफ्त जमीन देने का निर्णय लिया।

योगी के अनुसार, उन्होंने डीआरडीओ के सामने यह शर्त भी रखी कि प्रदेश के संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं का कैंपस सेलेक्शन किया जाए। इस शर्त को स्वीकार किया गया और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के माध्यम से चयन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के उद्घाटन के समय उन्होंने 500 युवा इंजीनियरों को देखा, जिन्होंने आईटीआई, पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों से पढ़ाई की थी। ये युवा अब लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में प्रदेश को 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसके अलावा, 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

3.25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश का एमएसएमई क्षेत्र लगभग मृतप्राय हो गया था। सरकार ने ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान देने और कारीगरों तथा छोटे कारोबारियों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें तीन करोड़ 25 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं।

कोविड कालखंड में दूसरे राज्यों से लौट रहे श्रमिकों और कारीगरों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय उनसे पूछा गया था कि इन लोगों को वापस क्यों लाया जा रहा है और उनके लिए क्या किया जाएगा। इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि ये उत्तर प्रदेश के लोग हैं, अपने प्रदेश में लौटना उनका अधिकार है और उन्हें वापस लाना उनका दायित्व है। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों को अपने प्रदेश में सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।

ज्ञान-विज्ञान की धरती को GCC का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति और परमात्मा की कृपा उत्तर प्रदेश की धरती पर आदिकाल से रही है। मां गंगा और मां यमुना की इस धरती पर प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ, जिन्होंने रामराज्य की अवधारणा को साकार किया। श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि भी उत्तर प्रदेश में है।

उन्होंने लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग तीन हजार वर्ष पहले यहां 88 हजार विद्वानों और ऋषि-मुनियों ने वैदिक ज्ञान की धरोहर को लिपिबद्ध किया था, जो आज पुराणों के रूप में मौजूद है। करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण का वाचन भी इसी धरती पर आत्मा, जीवन के उद्देश्य और जन्म-मृत्यु के रहस्य को समझने के लिए हुआ था।

योगी ने कहा कि प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक-त्र्यंबकेश्वर और उज्जैन में आयोजित होने वाला कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि ज्ञान-विज्ञान, नवाचार, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और विचारों के आदान-प्रदान का भी केंद्र रहा है। प्रयागराज महाकुंभ की भूमि और काशी ज्ञान की धरोहर के रूप में विश्वविख्यात रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी परंपरा को आधुनिक जीसीसी के स्वरूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र ‘आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए सभी दिशाओं से रास्ते खुले रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी यह दावा नहीं किया कि केवल वही सत्य है और बाकी सब असत्य।

योगी ने तक्षशिला, नालंदा, काशी, नवद्वीप, अवंतिका यानी उज्जैन और कांचीपुरम जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारत में उत्तर भारत के विद्वान और राजा काशी, पूर्वी भारत के नवद्वीप, मध्य भारत के उज्जैन और दक्षिण भारत के विद्वान कांचीपुरम से मान्यता प्राप्त करते थे।

मुख्यमंत्री ने समिट में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को आधुनिक ज्ञान व्यवस्था का फिर से प्रमुख केंद्र बनाना है। इसी दिशा में प्रदेश को जीसीसी, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और उच्च कौशल वाले रोजगार का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

समिट में उद्योग और प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद

जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल सहित उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री के संबोधन में निवेश, औद्योगिक विकास, रोजगार, तकनीकी शिक्षा, रक्षा उत्पादन, एमएसएमई और उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा प्रमुख विषय रहे। सरकार का घोषित लक्ष्य 2030-31 तक प्रदेश में 500 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करना है, ताकि उत्तर प्रदेश आधुनिक तकनीक, वैश्विक उद्योग और उच्च कौशल वाले रोजगार के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ा सके।

Location :  Lucknow

Published :  26 October 2026, 8:36 PM IST

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