DN Exclusive: डाइनामाइट न्यूज़ ने जब शंकराचार्य से पहचान पर किया सवाल… तब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खोला चौंकाने वाला राज

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी पहचान को लेकर उठे सवालों पर डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में खुलकर जवाब दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 24 January 2026, 6:22 PM IST
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Prayagraj: प्रयागराज की वह पावन धरती, जहां भगवान राम को भी आनंद की अनुभूति हुई थी, आज वहीं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से उनकी पहचान को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। माघ मेला क्षेत्र में उपजे इस विवाद ने धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

‘जहां मर्यादा पुरुषोत्तम को आनंद मिला, वहां शंकराचार्य से सवाल’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने डाइनामाइट न्यूज़ की टीम से कहा कि प्रयागराज केवल एक शहर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर भगवान राम जैसे आदर्श पुरुष को आनंद और शांति की अनुभूति हुई, उसी धरती पर आज शंकराचार्य से यह पूछा जाना कि “आप कौन हैं”, बेहद पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

शंकराचार्य पद को लेकर बढ़ा विवाद

माघ मेला के दौरान मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव के बाद यह विवाद और गहराता चला गया। प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए उनसे शंकराचार्य पद को लेकर जवाब मांगा गया, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। इस बहस में कई धर्माचार्य और कथावाचक भी कूद पड़े हैं।

विवाद के बीच बिगड़ी तबियत

इस पूरे विवाद का असर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सेहत पर भी देखने को मिला। उन्होंने खुद बताया कि विवाद के चलते उनकी तबियत कुछ समय के लिए बिगड़ गई थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी स्थिति ठीक है और वे स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

 

‘संघर्ष सत्य और धर्म के लिए’

डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि सनातन धर्म और उसकी परंपराओं की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों को अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे किसी भी दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

धार्मिक हलकों में गूंजा सवाल

इस पूरे प्रकरण ने धार्मिक समाज में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आध्यात्मिक परंपराओं को प्रशासनिक दायरों में बांधकर परखा जा सकता है। प्रयागराज की धरती पर उठे इस सवाल ने अब एक बड़े वैचारिक विमर्श का रूप ले लिया है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 24 January 2026, 6:22 PM IST

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