नवजात के पेट में मिला दूसरा भ्रूण! यूपी में सामने आया ‘फीटस इन फीटू’ का दुर्लभ मेडिकल केस

मुरादाबाद में एक बेहद दुर्लभ मेडिकल मामला सामने आया है, जहां सिर्फ 28 दिन के नवजात शिशु के पेट से ऑपरेशन कर 'फीटस इन फीटू' (जैसी दुर्लभ संरचना को बाहर निकाला गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 September 2026, 4:12 PM IST

Moradabad: मुरादाबाद में एक नवजात के पेट से ऐसी चीज निकली, जिसे देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। सिर्फ 28 दिन के इस बच्चे के पेट में एक बड़ी गांठ थी। जांच की गई तो गांठ के अंदर वसा, नरम ऊतक और हड्डियों जैसी संरचनाएं दिखाई दीं। खास बात यह थी कि इसमें एक लंबी हड्डी जैसी संरचना भी नजर आई। इसके बाद डॉक्टरों को एक बेहद दुर्लभ बीमारी फीटस इन फीटू का शक हुआ। विशेषज्ञों की टीम ने ऑपरेशन कर इस संरचना को बाहर निकाल दिया।

पेट में गांठ देखकर कराया गया चेकअप

बच्चे के पेट में गांठ का पता चलने के बाद डॉक्टरों ने जांच की। टेस्ट से पता चला कि गांठ सिर्फ सामान्य टिश्यू से नहीं बनी थी; इसमें फैट, सॉफ्ट टिश्यू और हड्डी जैसे तत्व शामिल थे। पीडियाट्रिक सर्जन और पीडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट के एक डॉक्टर ने विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान पेट के अंदर मौजूद असामान्य संरचना को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।

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क्या होता है फीटस इन फीटू?

फीटस-इन-फीटस जन्म से जुड़ी एक बहुत ही दुर्लभ स्थिति है। आसान शब्दों में कहें तो यह गर्भ में भ्रूण के विकास के दौरान होता है जब एक भ्रूण दूसरे के शरीर के अंदर चला जाता है। इसे "पैरासिटिक ट्विन" (परजीवी जुड़वां) से जुड़ी स्थिति माना जाता है। जुड़वां बच्चों के सामान्य मामलों के विपरीत इसमें दोनों भ्रूण स्वतंत्र रूप से विकसित नहीं होते हैं।

पेट में गांठ से चल सकता है पता

इस स्थिति का पता अक्सर जन्म के समय या उसके तुरंत बाद चलता है जब पेट में गांठ दिखाई देती है। कुछ बच्चों में पेट फूलना, उल्टी होना, दूध पीने में कठिनाई या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अंदरूनी संरचना आसपास के अंगों पर दबाव डाल सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति इतनी दुर्लभ है कि मेडिकल रिकॉर्ड बताते हैं कि यह हर 500,000 जीवित जन्मों में से लगभग एक मामले में होती है।

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28 दिन के बच्चे की सर्जरी थी बड़ी चुनौती

बच्चे की उम्र सिर्फ 28 दिन होने के कारण ऑपरेशन बहुत चुनौतीपूर्ण था। एनेस्थिसियोलॉजिस्ट एक डॉक्टर ने सर्जरी के दौरान बच्चे को सुरक्षित रूप से एनेस्थीसिया देने में अहम भूमिका निभाई। प्रक्रिया के बाद से नवजात की हालत में लगातार सुधार हो रहा है।

Location :  Moradabad

Published :  17 September 2026, 4:12 PM IST