
वंदे भारत पर थमा पत्थरों का वार (Image Source: Pinterest)
Lucknow: भारतीय रेल की सबसे प्रीमियम ट्रेनों में शुमार 'वंदे भारत एक्सप्रेस' और अन्य वीआईपी ट्रेनों को निशाना बनाने वाले पत्थरबाज अब खौफ के साए में हैं। पटरियों के किनारे छिपकर ट्रेनों पर पत्थर बरसाने वाले असामाजिक तत्व अब आसमान में उड़ती एक अदृश्य ताकत से डरकर दुबक गए हैं। उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) द्वारा शुरू की गई हाई-टेक ड्रोन निगरानी का असर अब साफ दिखने लगा है। सुरक्षा बलों की इस सख्त घेराबंदी के कारण पिछले एक साल में पत्थरबाजी की घटनाएं 32 से घटकर महज 3 रह गई हैं, जिसने सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है।
एक समय था जब देश की आधुनिक ट्रेन 'वंदे भारत' पर लगातार हो रही पत्थरबाजी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी थी। अकेले वंदे भारत पर ही पत्थरबाजी की 17 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो अब ड्रोन तकनीक और सख्त पेट्रोलिंग की बदौलत घटकर सिर्फ एक रह गई है। याद दिला दें कि पिछले साल दिसंबर में प्रयागराज से गोरखपुर जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर रायबरेली के पास महज पांच दिनों के भीतर तीन बार पथराव हुआ था, जिससे हड़कंप मच गया था। इससे पहले मेरठ-लखनऊ वंदे भारत को भी निशाना बनाया गया था।
इन शर्मनाक घटनाओं पर परमानेंट ब्रेक लगाने के लिए आरपीएफ कमांडेंट देवांश शुक्ल के नेतृत्व में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। आरपीएफ की टीम ने लखनऊ, रायबरेली, और ऊंचाहार जैसे चिन्हित 'ब्लैक स्पॉटों' (संवेदनशील इलाकों) पर नियमित रूप से ड्रोन से आसमान से नजर रखनी शुरू की। इस आधुनिक तकनीक का पहला बड़ा नतीजा तब मिला जब ऊंचाहार के रहने वाले सचिन कुमार नाम के एक पत्थरबाज को ड्रोन कैमरे ने पथराव करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इस पुख्ता सबूत के आधार पर कोर्ट ने उसे एक साल की जेल और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
आरपीएफ ने तकनीक के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर 'रेल मित्र' अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत पटरियों के आसपास रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों को जोड़ा जा रहा है, जो पत्थरबाजों की गुप्त सूचनाएं तुरंत आरपीएफ को देते हैं। पकड़े जाने वाले आरोपियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिसमें भारी जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है।
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आरपीएफ के बेड़े में शामिल किए गए ये आधुनिक ड्रोन 'नाइट विज़न' (रात में देखने वाले) कैमरों और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मैपिंग तकनीक से लैस हैं। इसका फायदा यह है कि अगर कोई व्यक्ति रात के अंधेरे या घने कोहरे में भी रेलवे ट्रैक के आसपास संदिग्ध हालत में घूमता या छिपता है, तो ड्रोन के थर्मल सेंसर तुरंत आरपीएफ कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है।
Location : Lucknow
Published : 20 June 2026, 10:26 AM IST