पश्चिमी यूपी में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता ने पार्टी के सभी पदों के साथ ही प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। इस खबर से सत्ता के गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है कि वह किस पार्टी का दामन थामेंगे।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ा कांग्रेस का दामन
Lucknow: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को शनिवार को एक बड़ा झटका लगा है। पश्चिमी यूपी में पार्टी का अहम चेहरा माना जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद सत्ता के गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।
सिद्दीकी के साथ करीब 72 अन्य दिग्गज नेताओं ने भी कांग्रेस को अलविदा कहा है, जिनमें लगभग दो दर्जन पूर्व विधायक शामिल हैं। सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी के भीतर वैचारिक घुटन और जनता की लड़ाई न लड़ पाने की बात कही।
सूत्रों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी कई बातों से नाराज थे। उन्हें ऐसे लगता था कि पार्टी में उचित सम्मान नहीं मिला। कांग्रेस ने उनकी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया, इस तरह की बातें भी सामने आ रही हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि वे राज्यसभा में जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया, उस वक्त भी उन्होंने नाराजगी जताई थी। हाल में राहुल गांधी रायबरेली के दौरे पर थे उस दौरान नसीमुद्दीन सिद्दीकी राहुल गांधी से मिलना चाहते थे लेकिन उन्हें को राहुल गांधी से मिलने नहीं दिया गया। इस बात को लेकर भी वे नाराज थे।
कांग्रेस को लगा बड़ा झटका
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को अपना इस्तीफा भेजा है। नसमुद्दीन सिद्दीकी के साथ उनके कई समर्थकों ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि अगले साल राज्य में विधानसभा का चुनाव होने है और उससे पहले पार्टी के एक बड़े नेता का अलग होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है।
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नसीमुद्दीन के इस फैसले से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जब बसपा का साथ छोड़ा था, तब कांग्रेस ने उन्हें पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था। उम्मीद जताई गई थी कि सिद्दीकी के आने से कांग्रेस को मुस्लिम वोट बैंक में मजबूती मिलेगी और संगठन को भी मदद मिलेगी लेकिन कुछ ही समय में यह उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई दी।
यह इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। ऐसी चर्चाएं हैं कि नसीमुद्दीन चंद्रशेखर आजाद रावण की पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं।नसीमुद्दीन पहले बहुजन समाजवादी (बीएसपी) पार्टी में थे. लेकिन, उन्होंने बीएसपी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन किया था। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का बेहद करीबी माना जाता है।
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कांग्रेस छोड़ने पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मुझे किसी के प्रति कोई नाराजगी नहीं है। मैं खड़गे, राहुल, प्रियंका, सोनिया जी का सम्मान करता हूं और करता रहूंगा। मेरे लिए वहां कोई काम नहीं था। मैं एक जमीनी स्तर का कार्यकर्ता हूं। आठ सालों तक मैं जमीनी स्तर पर काम नहीं कर सका। मैं कभी हाई-प्रोफाइल नेता नहीं रहा, न अब हूं, इसलिए मैं जमीनी स्तर पर काम करना चाहता हूं।