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प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। जिन किसानों की जमीन के ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजरती हैं, उन्हें अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मुआवजा मिलेगा। राज्य सरकार के इस निर्णय से हजारों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट के ताजा निर्णय के अनुसार, अब बिजली के टावर (खंभे) के नीचे आने वाली जमीन पर किसानों को 200 प्रतिशत यानी जमीन की कीमत का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही, जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं (राइट ऑफ वे या कॉरिडोर), वहां जमीन की कीमत का 30 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। यह व्यवस्था 765, 400, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनों पर लागू होगी।
ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा के अनुसार, साल 2018 से पहले टावर या लाइन कॉरिडोर में आने वाली जमीन पर किसानों को लगभग कोई मुआवजा नहीं मिलता था। 2018 में कुछ सुधार करते हुए टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85 प्रतिशत मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, लाइन के नीचे आने वाली जमीन के लिए तब भी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी, जिससे किसानों में असंतोष बना रहता था।
अब सरकार ने मुआवजा प्रणाली में व्यापक सुधार करते हुए इसे अधिक न्यायसंगत बना दिया है। टावर बेस के लिए 200 प्रतिशत मुआवजा तय किया गया है, जबकि लाइन कॉरिडोर के लिए पहली बार 30 प्रतिशत मुआवजा देने की व्यवस्था लागू की गई है। मुआवजा संबंधित जिले के जिलाधिकारी द्वारा तय सर्किल रेट के आधार पर दिया जाएगा।
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सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से किसानों को कुल मिलाकर 21 प्रतिशत से 33 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलेगा। पहले जहां किसानों को या तो बहुत कम मुआवजा मिलता था या बिल्कुल नहीं मिलता था, अब उन्हें सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि बिजली परियोजनाओं को भी गति मिलेगी। अक्सर मुआवजे को लेकर विवाद होने के कारण परियोजनाएं अटक जाती थीं, लेकिन अब किसानों की सहमति और सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
Location : Lucknow
Published : 5 May 2026, 9:34 AM IST