यूपी में बिजली विभाग की मनमानी से सरकार में हड़कंप, मंत्री ने किया जवाब तलब

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने यूपीपीसीएल चेयरमैन को पत्र लिखकर विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बिना अनुमति बिजली बिलों में एफपीपीएएस सरचार्ज लागू करने, महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिलने और संविदा कर्मचारियों की छंटनी जैसे मुद्दों पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए जवाब तलब किया है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 11 June 2026, 1:14 PM IST

Lucknow:  उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में प्रशासनिक स्तर पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंत्री ने कई अहम फैसलों को लेकर नाराजगी जताते हुए विस्तृत जवाब मांगा है।

बिना अनुमति लागू हुआ एफपीपीएएस सरचार्ज

ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत एफपीपीएएस (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) लागू करने का फैसला उनकी जानकारी और अनुमति के बिना लिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णयों से सरकार की छवि प्रभावित होती है और आम उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

मंत्री का कहना है कि जनता से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों में सरकार और विभागीय नेतृत्व को पहले विश्वास में लिया जाना चाहिए था।

मीडिया रिपोर्ट से मिल रही विभागीय जानकारी

पत्र में ऊर्जा मंत्री ने विभागीय समन्वय की कमी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार बिजली विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों, योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी उन्हें अधिकारियों से नहीं बल्कि मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से मिलती है।

उन्होंने इसे प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि विभाग और सरकार के बीच बेहतर संवाद और समन्वय की आवश्यकता है।

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अनुभवी अधिकारियों को हटाने पर भी जताई नाराजगी

ऊर्जा मंत्री ने यूपीपीसीएल मुख्यालय में प्रशासनिक व्यवस्था और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदार पदों से हटाने के मामलों पर सवाल उठाते हुए इसके पीछे के कारणों की जानकारी मांगी है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभागीय फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संविदा कर्मचारियों की छंटनी पर मांगी रिपोर्ट

पत्र में संविदा कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि कुछ संविदा कर्मियों को जाति और धर्म के आधार पर नौकरी से हटाया गया है।

उन्होंने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा है कि ऐसी कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और उसका आधार क्या था।

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राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज

ऊर्जा मंत्री और यूपीपीसीएल चेयरमैन के बीच सामने आया यह विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार और विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। फिलहाल मंत्री के पत्र ने बिजली विभाग की कार्यशैली और समन्वय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Location :  Lucknow

Published :  11 June 2026, 12:27 PM IST