“महंगाई डायन खाए जात है…” आखिर यूपी वालों को क्यों याद आ रहा है ये गाना? जून से बिजली बिल में होने वाला है बड़ा बदलाव

दूध महंगा, पेट्रोल-डीजल महंगा, रसोई का खर्च महंगा और अब बिजली भी महंगी। उत्तर प्रदेश में जून से बिजली बिल पर 10 फीसदी अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगने जा रहा है। ऐसे में लोगों को फिल्मी गाने की वह लाइन याद आने लगी है-"सखी सईया तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है।"

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 30 May 2026, 1:24 PM IST

Lucknow: "सखी सईया तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है..." यह गीत एक बार फिर उत्तर प्रदेश के लोगों की जुबान पर चढ़ता नजर आ रहा है। वजह है बढ़ती महंगाई और अब बिजली बिल पर पड़ने वाला नया बोझ। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने फ्यूल सरचार्ज में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है, जिसका असर जून महीने के बिजली बिल में दिखाई देगा।

महंगाई के बीच बिजली का नया झटका

पिछले कुछ महीनों में लोगों ने दूध, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम बढ़ते देखे हैं। अब बिजली बिल में भी अतिरिक्त शुल्क जुड़ने जा रहा है। ऐसे में आम आदमी की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि कमाई भले बढ़े या न बढ़े, लेकिन खर्चों की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है।

जून से देना होगा ज्यादा बिल

UPPCL के फैसले के अनुसार, जून महीने से बिजली उपभोक्ताओं के बिल में 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज जोड़ा जाएगा। इसका असर घरेलू, व्यावसायिक और अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यानी जो बिल पहले आता था, अब उसमें अतिरिक्त राशि भी शामिल होगी।

आखिर क्यों बढ़ाया गया शुल्क?

बिजली विभाग का कहना है कि बिजली उत्पादन और खरीद की लागत में बढ़ोतरी हुई है। इसी अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया गया है। विभाग के मुताबिक यह कदम वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।

कटौती भी, महंगाई भी

उपभोक्ताओं की नाराजगी इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि प्रदेश के कई इलाकों में बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। गर्मी के मौसम में जहां लोगों को निर्बाध बिजली की उम्मीद रहती है, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए बिल का बोझ भी उन्हें उठाना पड़ेगा।

आम आदमी का बिगड़ सकता है बजट

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़े हुए फ्यूल सरचार्ज का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा। जिन घरों में बिजली की खपत अधिक है, वहां अतिरिक्त भुगतान और ज्यादा महसूस होगा। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की लागत भी बढ़ सकती है।

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लोगों को क्यों याद आ रहा है यह गाना?

महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए यह स्थिति बिल्कुल उस मशहूर गीत जैसी लग रही है, जिसमें कहा गया था—"सखी सईया तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है।" क्योंकि कमाई चाहे जितनी हो, बढ़ते खर्च उसकी रफ्तार को पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं। अब जून का बिजली बिल आने के बाद लोगों को इस गाने का मतलब शायद पहले से ज्यादा समझ आएगा।

Location :  Lucknow

Published :  30 May 2026, 12:07 PM IST