
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेंस नेता राहुल गांधी (Img: X)
Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव 2024 के प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस गठबंधन में अधिक सीटों की मांग कर रही है। वहीं, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के एमएलसी चुनावों के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी की दावेदारी और संगठनात्मक प्रदर्शन भी चर्चा में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच सीटों का हिसाब किस आधार पर तय होगा?
उत्तर प्रदेश की 11 एमएलसी सीटों के चुनाव में बीजेपी ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों के बाद सपा की विधान परिषद में सदस्य संख्या बढ़कर 12 हो गई है। हालांकि, इन चुनावों का परिणाम विधानसभा चुनाव के सीट बंटवारे को सीधे तय नहीं करता, लेकिन गठबंधन की बातचीत में दोनों दलों के प्रदर्शन और संगठनात्मक ताकत का मुद्दा जरूर उठ सकता है।
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यूपी विधानसभा की 403 सीटों के लिए कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की बातचीत शुरू हो चुकी है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 23 अक्टूबर को बताया था कि पार्टी ने सपा को 175 से 200 सीटों की शुरुआती सूची सौंपी है। कांग्रेस का कहना है कि वह गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है।
लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने यूपी की 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और छह पर जीत हासिल की थी। वहीं, सपा ने 62 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और 37 सीटों पर जीत दर्ज की। दोनों दल इस प्रदर्शन को आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति में अहम मान रहे हैं।
कांग्रेस ने 175 से 200 सीटों की सूची सौंपी (Img: X)
सपा और कांग्रेस ने 2017 का विधानसभा चुनाव भी गठबंधन में लड़ा था। उस चुनाव में कांग्रेस को 114 सीटें मिली थीं, लेकिन पार्टी केवल सात सीटें जीत सकी थी। इस बार सीटों के बंटवारे में जीतने की संभावना, स्थानीय संगठन और उम्मीदवारों की स्थिति को अहम आधार बनाए जाने की बात सामने आ रही है।
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हालिया एमएलसी चुनाव में सपा ने पांच सीटें जीतकर विधान परिषद में अपनी संख्या 12 तक पहुंचा दी है। पार्टी ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में तीन और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में दो सीटें हासिल कीं। बीजेपी ने छह सीटें जीतीं। इस प्रदर्शन के बाद सपा की ओर से सीट बंटवारे में उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता और जमीनी संगठन को आधार बनाने की बात को और महत्व मिल सकता है।
फिलहाल सपा-कांग्रेस के बीच अंतिम सीट समझौते का ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में देखना होगा कि लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन, विधानसभा चुनावों का पुराना अनुभव और एमएलसी नतीजे बातचीत की दिशा को किस तरह प्रभावित करते हैं।
Location : Lucknow
Published : 30 October 2026, 9:30 AM IST