बेगम अख्तर पुण्यतिथि: गजलों की दुनिया की मल्लिका थीं बेगम अख्तर, आवाज का जादू आज भी बरकरार

आज 30 अक्टूबर को मशहूर गायिका बेगम अख्तर की पुण्यतिथि है।उनकी गायकी में दर्द मोहब्बत और जिंदगी के एहसास इस तरह घुले होते थे कि सुनने वाला कुछ देर के लिए सब कुछ भूल जाता था। उन्होंने अपनी आवाज के दम पर संगीत की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी भुलाया नही जा सकता।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 30 October 2026, 8:53 AM IST
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 New Delhi: मशहूर गायिका बेगम अख्तर की पुण्यतिथि है। उन्हें भारतीय संगीत की दुनिया में गजल और ठुमरी की सबसे खास आवाजों में गिना जाता है। उनकी गायकी में दर्द मोहब्बत और जिंदगी के एहसास इस तरह घुले होते थे कि सुनने वाला कुछ देर के लिए सब कुछ भूल जाता था। उन्होंने अपनी आवाज के दम पर संगीत की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी भुलाया नही जा सकता।

बचपन से ही संगीत की ओर था झुकाव

बेगम अख्तर का जन्म 7 अक्टूबर 1914 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। उनका असली नाम अख्तरी बाई फैजाबादी था। बचपन से ही उन्हें संगीत का बहुत शौक था। उनकी मां मुश्तरी बेगम ने उनकी कला को पहचाना और उन्हें संगीत सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उस्ताद अता मोहम्मद खान और उस्ताद अब्दुल वहीद खान जैसे बड़े संगीत गुरुओं से शिक्षा ली। महज सात साल की उम्र में उन्होंने मंच पर अपनी गायकी का हुनर दिखाना शुरू कर दिया था।

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बचपन सी ही था संगीत के प्रति झुकाव( AI Generated ig)

गजल को दी नई पहचान

बेगम अख्तर ने गजल, ठुमरी और दादरा को अपनी गायकी से एक अलग पहचान दिलाई। उनकी आवाज में एक अलग ही मिठास और गहराई थी। जब वह कोई गजल गाती थीं तो उनके शब्द सीधे सुनने वालों के दिल तक पहुंचते थे। 'ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया', 'दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे' और 'वो जो हममें तुममें करार था' जैसी गजलों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। उन्होंने फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू दिखाया। 'रोटी', 'पन्ना दाई', 'दाना पानी' और 'एहसान' जैसी फिल्मों से भी उनका नाम जुड़ा रहा।

कई बड़े सम्मानों से हुईं सम्मानित

संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए साल 1968 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद 1972 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। साल 1975 में मरणोपरांत उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें प्यार से 'मल्लिका-ए-गजल' यानी गजलों की रानी कहा जाता था।

संगीत की दुनिया में हमेशा जिंदा रहेगी आवाज

30 अक्टूबर 1974 को अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के बाद बेगम अख्तर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उस समय उनकी उम्र 60 साल थी। उनके जाने से संगीत जगत को बड़ी नुकसान पहुचा, लेकिन उनकी गजलें आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए हैं। आज भी जब कोई उनकी आवाज में गजल सुनता है तो ऐसा लगता है जैसे वह अपने शब्दों से जिंदगी के हर एहसास को बयां कर रही हों। बेगम अख्तर भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और संगीत की विरासत हमेशा याद की जाती रहेगी।

Location :  New Delhi

Published :  30 October 2026, 8:53 AM IST

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