
पूर्व ब्लॉक प्रमुख समेत तीन को उम्रकैद मिली (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
Mau: मऊ के बहुचर्चित रामकिशुन मल्लाह हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका समेत तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद जिले में एक बार फिर यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। अदालत ने दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-1 के न्यायाधीश बाकर शमीम रिजवी ने लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने रमेश सिंह काका, सुदर्शन सिंह और बृजेश सिंह को हत्या और हत्या के षड्यंत्र से जुड़े मामलों में दोषी करार दिया।
घटना 6 मार्च 2003 की है। शहर कोतवाली क्षेत्र के भीटी मोहल्ले निवासी रामकिशुन मल्लाह सुबह पूजा करने के बाद बाइक से घर से निकले थे। आरोप है कि रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उन्हें गोली मार दी। इस हमले में रामकिशुन की मौके पर ही मौत हो गई थी।
मृतक की मां शांति देवी की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और पुरानी रंजिश को हत्या की वजह बताया गया।
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कोर्ट ने बृजेश सिंह को हत्या, हत्या की साजिश, मारपीट और आयुध अधिनियम के तहत दोषी पाया। उन्हें हत्या के मामले में उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। वहीं हत्या की साजिश में भी आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
सुदर्शन सिंह को हत्या की साजिश और आरोपियों को शरण देने का दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ जुर्माना लगाया गया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका को भी हत्या के षड्यंत्र में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी तय समय पर जुर्माना जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं चार आरोपियों की मौत हो जाने के कारण उनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 15 गवाह पेश किए थे। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि सभी साक्ष्य हत्या की साजिश की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने आरोपियों को झूठा फंसाए जाने की दलील दी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त माना।
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कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषियों से वसूले जाने वाले जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि मृतक रामकिशुन मल्लाह की मां और वादिनी शांति देवी को दी जाएगी। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
Location : Mau
Published : 13 May 2026, 3:53 PM IST