यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाते हुए 2012 के रेगुलेशन को लागू रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि मुद्दा सिर्फ नियमों का नहीं बल्कि नीयत का भी है।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Img: Google)
Lucknow: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी से जुड़े एक अहम मामले में फिलहाल 2012 में नोटिफाई किए गए नियमों को लागू रखने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले को नए यूजीसी नियमों पर अंतरिम रोक के तौर पर देखा जा रहा है। फैसले के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस फैसले को केंद्र सरकार के लिए झटका बताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ऐसे नियम लाने की कोशिश कर रही थी, जो समाज को बांटने वाले साबित हो सकते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समय रहते संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस पर रोक लगा दी।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सच्चा न्याय वही होता है जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है कि कानून की भाषा भी साफ हो और उसके पीछे की भावना भी सही हो।
सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है।
क़ानून की भाषा भी साफ़ होनी चाहिए और भाव भी।
बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।
न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय
न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 29, 2026
अखिलेश यादव ने आगे कहा, “बात सिर्फ नियम की नहीं, नीयत की भी होती है। न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय। न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो और न ही किसी के साथ नाइंसाफी।”
वहीं समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भी यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवाल उठाए हैं और सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में फैसले लेते समय सभी वर्गों की भावना और संवैधानिक मूल्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
UGC Rules: 2012 के नियम ही रहेंगे लागू, जानिये क्या कहता है पुराना कानून?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने आदेश दिया कि फिलहाल 2012 में बने पुराने नियम ही लागू रहेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर 19 मार्च 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
CJI सूर्यकांत ने चिंता जताते हुए कहा कि नए नियमों से शैक्षणिक संस्थानों में अलगाव की स्थिति पैदा हो सकती है, यहां तक कि हॉस्टल व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश और समाज को एकजुट रखने की दिशा में काम होना चाहिए। जस्टिस बागची ने भी इस विचार से सहमति जताई।
नए नियमों के तहत हर कॉलेज में ईक्वल अपॉर्च्यूनिटी सेंटर (EOC), समता समिति और इक्वलिटी स्क्वाड बनाने का प्रावधान था। भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में बैठक, 15 दिन में रिपोर्ट और सख्त कार्रवाई की समयसीमा तय की गई थी। गंभीर मामलों में कॉलेज की ग्रांट रोकने या मान्यता रद्द करने तक का अधिकार UGC को दिया गया था।