UGC Rules: 2012 के नियम ही रहेंगे लागू, जानिये क्या कहता है पुराना कानून?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी किए गए Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को फिलहाल लागू करने से रोक दिया है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 January 2026, 2:33 PM IST
google-preferred

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी किए गए Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को फिलहाल लागू करने से रोक दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इन नियमों में कई अहम पहलू स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं, जिससे इनके गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इन गाइडलाइंस का मसौदा दोबारा तैयार करे और नियमों को अधिक पारदर्शी, स्पष्ट और व्यावहारिक बनाए।

क्या हैं UGC के नए नियम?

UGC ने जनवरी 2026 में ये नए नियम जारी किए थे। इनका घोषित उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना था। हालांकि, नियम लागू होते ही देशभर में यह सवाल उठने लगा कि जब भेदभाव रोकने के लिए पहले से कानून, कोर्ट के आदेश और संस्थागत तंत्र मौजूद हैं, तो नए नियमों की जरूरत क्यों पड़ी?

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी; जानें अब कब होगी सुनवाई

पहले से मौजूद हैं कड़े कानून

भारत में भेदभाव रोकने के लिए पहले से ही कई संवैधानिक और कानूनी प्रावधान लागू हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 समानता का अधिकार देते हैं और जाति-आधारित भेदभाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हैं। SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, विश्वविद्यालयों के सेवा नियम और स्टैच्यूट्स, Equal Opportunity Cells, Anti-Ragging Committees, Internal Complaints Committees और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पहले से सक्रिय हैं।

सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में विश्वविद्यालयों को पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के निर्देश देता रहा है, खासकर कैंपस भेदभाव और छात्र आत्महत्या जैसे संवेदनशील मामलों में।

फिर नया नियम क्या बदलता है?

वरिष्ठ वकील अस्था अनुप चतुर्वेदी के अनुसार, नए नियम कोई नया अधिकार नहीं देते, बल्कि पुराने अधिकारों को अनिवार्य और दंडात्मक बना देते हैं। अब जो व्यवस्थाएं पहले सलाह या दिशानिर्देश के रूप में थीं, वे बाध्यकारी नियम बन गई हैं और यह सभी सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों पर समान रूप से लागू होंगी।

नए ढांचे में क्या-क्या बदला गया?

2026 के नए नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में कई बड़े और सख्त बदलाव किए गए हैं। अब हर संस्थान में Equal Opportunity Centre की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है, जिसके अंतर्गत एक Equity Committee होगी और इसे पहले की तुलना में कहीं अधिक अधिकार दिए गए हैं। इसके साथ ही 24×7 शिकायत तंत्र, ऑनलाइन पोर्टल और मामलों के निस्तारण के लिए कड़ी समय-सीमा तय की गई है—शिकायत मिलते ही 24 घंटे के भीतर बैठक, 15 दिनों में जांच रिपोर्ट और सात दिनों के अंदर कार्रवाई अनिवार्य होगी। यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो UGC को यह अधिकार होगा कि वह उसकी फंडिंग रोक सके, मान्यता प्रभावित कर सके और नए कोर्स की मंजूरी पर भी रोक लगा सके। कुल मिलाकर, 2012 के अपेक्षाकृत ढीले प्रावधानों की जगह अब 2026 का ढांचा पूरी तरह कठोर, बाध्यकारी और दंड से जुड़ा बना दिया गया है।

विवाद की असली वजह क्या है?

विवाद की असली वजह यहीं से शुरू होती है। कई शिक्षाविदों और प्रशासकों का कहना है कि UGC यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि पहले से मौजूद कानून और संस्थागत तंत्र आखिर क्यों विफल हुए। नए नियमों में भेदभाव रोकने का उद्देश्य तो मजबूत है, लेकिन दुरुपयोग रोकने के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया तय नहीं की गई है। अभी तक यह साफ नहीं है कि फर्जी शिकायत की परिभाषा क्या होगी, सबूत का मानक किस आधार पर तय किया जाएगा, अपील की प्रक्रिया कैसी होगी और जांच के दौरान शिकायतकर्ता व आरोपी दोनों के अधिकार और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त दंड के डर से संस्थान जरूरत से ज्यादा सतर्क हो सकते हैं, जिससे निष्पक्षता और संतुलन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से दो स्पष्ट सिद्धांतों पर जोर दिया है: जाति-आधारित अपमान पर जीरो टॉलरेंस और जांच प्रक्रिया में पूर्ण निष्पक्षता और स्पष्टता। विशेषज्ञों और आलोचकों का कहना है कि नए UGC नियम पहले सिद्धांत को तो मजबूती से लागू करते हैं, लेकिन दूसरे सिद्धांत यानी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच प्रक्रिया के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन और स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं प्रदान करते।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 29 January 2026, 2:33 PM IST

Advertisement
Advertisement