
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल
मुजफ्फरनगर में एक अधिवक्ता की अपहरण के बाद हत्या के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। साल 2019 में दोस्ती, भरोसे और पैसों के विवाद के बीच हुई इस सनसनीखेज हत्या ने एक बार फिर पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। एडीजे कोर्ट नंबर-3 ने इस केस में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है जबकि शव ठिकाने लगाने में मदद करने वाले चौथे आरोपी को 7 साल के कठोर कारावास से दंडित किया गया है। कोर्ट ने सभी दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है।
यह मामला 16 अक्टूबर 2019 का है। जब मोहम्मद अजहर ने नगर कोतवाली में लिखित शिकायत देकर बताया था कि उनके बेटे अधिवक्ता समीर सैफी का अपहरण कर लिया गया है और उनकी जान को खतरा है। शिकायत मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए धारा 364 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
पुलिस ने मामले में नामजद आरोपी सिलोंग अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज और दिनेश को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में जो कहानी सामने आई। उसने सभी को चौंका दिया।
मुजफ्फरनगर में अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड पर बड़ा फैसला
एडीजे कोर्ट नंबर-3 ने 3 दोषियों को फांसी और एक आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई। साल 2019 में अधिवक्ता समीर सैफी का अपहरण कर हत्या की गई थी। कोर्ट ने सभी दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है।#Muzaffarnagar #UPNews… pic.twitter.com/HMhy8n9nk7— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 6, 2026
जांच में खुलासा हुआ कि समीर सैफी आरोपियों के दोस्त थे। लेकिन इनके बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने खूनी रूप ले लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पहले समीर सैफी को योजनाबद्ध तरीके से बुलाया, फिर उनका अपहरण किया और बाद में रस्सी से गला दबाकर हत्या कर दी।
हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के लिए दिनेश नाम के व्यक्ति की मदद ली गई। शव को सीकरी गांव के पास एक मुर्गी फार्म के समीप खेत के टीले में गड्ढा खोदकर दबा दिया गया था। करीब तीन दिन बाद 20 अक्टूबर 2019 को शव बरामद हुआ था।
इस बहुचर्चित केस में सोमवार को एडीजे कोर्ट नंबर-3 ने सुनवाई पूरी करते हुए बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने सिलोंग अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई। वहीं दिनेश को शव ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के अपराध में 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई। अदालत ने सभी दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता के मुताबिक, मुख्य तीन दोषियों पर लगभग 11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि समीर सैफी को 15 अक्टूबर 2019 को बार एसोसिएशन में चैंबर अलॉट हुआ था और उसी दिन उनके चैंबर का उद्घाटन भी हुआ था। शाम को घर लौटने के बाद वह अचानक लापता हो गए। इसके बाद परिवार ने गुमशुदगी दर्ज कराई और अधिवक्ताओं ने भी आंदोलन किया। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया कि पैसों के विवाद के चलते दोस्तों ने ही समीर को घर से बुलाया और उनकी हत्या कर दी। अदालत ने इस वारदात को बेहद गंभीर मानते हुए इसे रिश्तों और भरोसे के कत्ल की श्रेणी में देखा।
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यह मामला साल 2019 से लगातार अदालत में चल रहा था। पीड़ित पक्ष के अनुसार, इस केस की एक अहम बात यह भी रही कि मुख्य आरोपी सिलोंग अल्वी को आज तक हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली, जबकि बाकी आरोपी बीच में जमानत पर बाहर आ गए थे। अब सजा सुनाए जाने के बाद चारों दोषियों को फिर से जेल भेज दिया गया है।
Location : Muzaffarnagar
Published : 7 April 2026, 1:28 AM IST