नए बीएसए के सामने शिक्षा माफियाओ से सीधी टक्कर, फर्जी शिक्षकों और बाबू राज पर चलेगा डंडा या फिर होगी खानापूर्ति?

जनपद के नए बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत सिंह ने कार्यभार संभाल लिया है। लेकिन उनके सामने फर्जी शिक्षकों की रिकवरी, विभागीय भ्रष्टाचार, बाबुओं की मनमानी, निजी विद्यालयों की लूट और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं पर अंकुश लगाने जैसी कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 2 June 2026, 6:58 PM IST

Maharajganj: महराजगंज जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग को नया नेतृत्व मिल गया है। मंगलवार को सुरजीत सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद जताई।

हालांकि नए बीएसए के सामने केवल विभागीय प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि लंबे समय से चर्चा में रहे कई विवादों और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई करने की भी बड़ी चुनौती है।

बेसिक शिक्षा विभाग पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न कारणों से लगातार सुर्खियों में रहा है। सबसे बड़ा और चर्चित मामला फर्जी शिक्षकों का है। विभागीय स्तर पर करीब 48 से 49 ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जिन पर फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप लगे थे। कई मामलों में सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन अब तक सरकारी खजाने को हुए नुकसान की पूरी रिकवरी नहीं हो सकी है। इसको लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

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सूत्रों और विभागीय जानकारों के अनुसार कुछ मामलों में कार्यालय स्तर पर बाबुओं और कर्मचारियों की सांठगांठ के आरोप भी सामने आते रहे हैं। फाइलों के निस्तारण में देरी, शिकायतों का लंबित रहना और कार्रवाई की प्रक्रिया का धीमा होना भी चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में नए बीएसए से अपेक्षा की जा रही है कि वह कार्यालय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के साथ जवाबदेही भी तय करेंगे।

विभाग के सामने गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों का संचालन भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई क्षेत्रों में ऐसे स्कूल संचालित होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी कर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यदि इन शिकायतों पर सख्ती से कार्रवाई होती है तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

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इसके अलावा परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करना और छात्र नामांकन बढ़ाना भी नए बीएसए की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। ग्रामीण क्षेत्रों से अक्सर विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

निजी विद्यालयों की मनमानी फीस, ड्रेस और किताबों की अनिवार्य खरीद जैसे मुद्दे भी अभिभावकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा विभाग ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी रखे और नियमों का पालन सुनिश्चित कराए।

Location :  Maharajganj

Published :  2 June 2026, 6:58 PM IST