हिंदी
मां तपेश्वरी देवी मंदिर का रहस्य (IMG: Dynamite News)
Kanpur: रामायण काल की मान्यताओं से जुड़ा एक ऐसा मंदिर, जहां माता सीता के तप की कहानी आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। कानपुर की तंग गलियों के बीच स्थित मां तपेश्वरी देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दर्शन करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इतना ही नहीं, मंदिर में मौजूद कुंड के जल को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर का इतिहास, माता सीता से जुड़ी कथा और आखिर कैसे पड़ा मां का नाम तपेश्वरी देवी।
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर फीलखाना क्षेत्र के बिरहाना रोड पर मां तपेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। शहर के व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाके में होने के बावजूद मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। दूर-दराज के इलाकों से लोग मां के दर्शन करने और अपनी मनोकामनाओं के लिए पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
मां तपेश्वरी देवी मंदिर की सबसे खास बात इससे जुड़ी माता सीता की कथा है। मंदिर के पुजारी राम लखन जी के अनुसार, इस स्थान को लेकर मान्यता रामायण काल से जुड़ी हुई है। धार्मिक कथा के मुताबिक, जब भगवान राम के कहने पर लक्ष्मण माता सीता को वन में छोड़ने के लिए लेकर आए थे, तब इस जगह पर उनके रथ का पहिया रुक गया था। बताया जाता है कि इसी दौरान माता सीता को किसी दिव्य शक्ति का आभास हुआ। इसके बाद माता सीता बिठूर पहुंचीं और वहां से पैदल इस स्थान तक आती थीं। मान्यता है कि माता सीता यहां तपस्या किया करती थीं। इसी वजह से इस स्थान को उनके तप से जोड़कर देखा जाता है।
मंदिर के नाम के पीछे भी एक खास धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि माता सीता को वन देवी के रूप में भी जाना जाता था और वह इस स्थान पर तपस्या करती थीं। माता सीता के तप से जुड़ी इसी मान्यता के चलते मंदिर का नाम तपेश्वरी देवी पड़ा। श्रद्धालु मां को शक्ति स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। मंदिर में देवी काली, कमला, विमला, सरस्वती और लक्ष्मी के स्वरूपों की उपस्थिति बताई जाती है। नवरात्रि के दौरान भक्त इन देवी स्वरूपों के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
मां तपेश्वरी देवी मंदिर परिसर में एक कुंड भी मौजूद है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है। मान्यता है कि भक्त इस कुंड का जल अपने घर ले जाते हैं और उसका सेवन करते हैं। लोगों का विश्वास है कि इस जल से रोगों से मुक्ति मिलती है। हालांकि, कुंड के जल से बीमारियां ठीक होने के दावों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी बीमारी की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह और उपचार लेना जरूरी है। इसके बावजूद धार्मिक आस्था के चलते श्रद्धालु इस कुंड को मंदिर का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
कानपुर में नाबालिग से दरिंदगी का आरोप, मामा समेत 10 पर केस; डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्रचलित मान्यता भगवान राम और माता सीता के पुत्रों लव-कुश से संबंधित है। कहा जाता है कि रामायण काल में इसी स्थान पर लव और कुश का मुंडन संस्कार हुआ था। इसी वजह से यहां बच्चों का मुंडन कराने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। कई परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने के लिए मंदिर पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के आशीर्वाद से बच्चों का जीवन सुखमय और मंगलमय रहता है। इसी परंपरा के चलते मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ मुंडन संस्कार भी कराए जाते हैं।
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां तपेश्वरी देवी मंदिर में भक्तों की भीड़ और बढ़ जाती है। श्रद्धालु मां के दर्शन करने के साथ पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठान करते हैं। मान्यता के अनुसार, भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर में अखंड ज्योति भी जलाते हैं। नवरात्रि को देखते हुए मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन दिनों दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। कोई परिवार की सुख-शांति की कामना करता है, तो कोई अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति के लिए मां के दरबार में माथा टेकता है।
Location : Kanpur
Published : 9 October 2026, 6:54 PM IST