चूल्हे की महक से बिजनेस की चमक तक; 85 देशों की प्लेट पर सुल्तानपुर का स्वाद, महिलाओं को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय उड़ान

सुल्तानपुर की रसोई में तैयार बड़ी पूड़ी, कोहड़े की सब्जी और लाल पेड़ा अब 85 देशों के खरीदारों के सामने होगा। क्या यह पारंपरिक स्वाद गांव की महिलाओं के लिए कमाई का नया रास्ता खोल पाएगा?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 25 September 2026, 1:35 PM IST
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Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की रसोई में पीढ़ियों से तैयार हो रहा पारंपरिक स्वाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने पहुंचने जा रहा है। बड़ी पूड़ी, कोहड़े की पारंपरिक सब्जी और खास स्वाद वाला लाल पेड़ा 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन स्थानीय व्यंजनों को पहचान दिलाने के साथ महिलाओं के घरेलू हुनर को कारोबार और आय के अवसर में बदलने का मंच भी बन सकता है।

घर के हुनर को बाजार से जोड़ने की चुनौती

गांव और कस्बों में बड़ी पूड़ी, पारंपरिक सब्जी और मिठाइयां बनाने का हुनर लंबे समय से घरेलू जीवन का हिस्सा रहा है। खासकर महिलाओं का यह पाक-कौशल अक्सर परिवार और स्थानीय मांग तक ही सीमित रहता है। अब जरूरत इस हुनर को बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की है। स्वच्छता, समान गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, टिकाऊपन और उचित कीमत जैसे पहलुओं पर ध्यान देकर घरेलू खाद्य उत्पादों को कारोबार में बदला जा सकता है।

बड़ी पूड़ी और लाल पेड़े को मिली पहचान

एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP) के तहत सुल्तानपुर की बड़ी पूड़ी-कोहड़े की सब्जी और लाल पेड़ा चयनित हैं। मायंग के सरवन कुमार बड़ी पूड़ी-कोहड़े की सब्जी और शहर के आशीष आर्या लाल पेड़ा लेकर ट्रेड शो में पहुंचेंगे। इन उत्पादों की खासियत जिले की पारंपरिक पाक पहचान है, जिसे बड़े बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए बन सकता है मॉडल

इस पहल का विस्तार महिला स्वयं सहायता समूहों और घरेलू खाद्य कारोबार तक हो सकता है। यदि बड़ी पूड़ी, पारंपरिक मसाले, अचार, मिठाइयों और अन्य स्थानीय उत्पादों को मानकीकृत तरीके से तैयार करने, पैक करने और बेचने की व्यवस्था विकसित होती है तो महिलाएं उत्पादन के साथ ब्रांडिंग और बिक्री में भी भागीदारी कर सकती हैं। इससे घरेलू हुनर को महिलाओं की आर्थिक पहचान से जोड़ा जा सकता है।

85 देशों के खरीदारों के सामने होगा सुल्तानपुर

पांच दिवसीय ट्रेड शो में 85 देशों से 550 से अधिक विदेशी खरीदारों के पहुंचने की उम्मीद है। देशभर के 2400 से अधिक प्रदर्शक भी इसमें शामिल होंगे। इस मंच पर उत्पादों के प्रदर्शन के साथ खरीदारों और उद्यमियों के बीच कारोबारी संपर्क भी कराया जाएगा। इससे सुल्तानपुर के पारंपरिक खाद्य उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर नए खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

ट्रेड शो के बाद होगी असली परीक्षा

महिला उद्यमिता को मजबूत करने के लिए केवल ट्रेड शो में उत्पाद प्रदर्शित करना पर्याप्त नहीं होगा। आयोजन के बाद भी बाजार से जुड़ाव बनाए रखना जरूरी होगा। इसके लिए छोटे उत्पादकों और महिला समूहों को प्रशिक्षण, पैकेजिंग, खाद्य गुणवत्ता, ब्रांडिंग, डिजिटल बिक्री और बाजार संपर्क की सुविधा मिलना महत्वपूर्ण होगा। उत्पादन से लेकर ग्राहक तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था बनने पर पारंपरिक व्यंजन नियमित आय का साधन बन सकते हैं।

मूंज उत्पाद में भी महिला हुनर की संभावना

ODOP के तहत धनपतगंज के मायंग की अर्चिता सिंह मूंज उत्पाद लेकर ट्रेड शो में पहुंचेंगी। मूंज से बने उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प से जुड़े हैं। इन्हें बड़े बाजार से जोड़ने में महिला कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। वहीं कोटिया निवासी महमूद अहमद लेदर बैग का प्रदर्शन करेंगे।

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स्थानीय उत्पादों को नए बाजार से जोड़ने का अवसर

उपायुक्त उद्योग नेहा सिंह के अनुसार प्रतिभागियों को आने-जाने और ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। ट्रेड शो स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा। सुल्तानपुर के लिए अब चुनौती यह होगी कि इस मंच से लौटने के बाद कितने स्थानीय उत्पाद स्थायी बाजार बना पाते हैं।

गांव की महिलाओं तक पहुंचे कमाई का लाभ

सुल्तानपुर की रसोई में तैयार पारंपरिक स्वाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने होगा। यदि खाद्य और हस्तशिल्प उत्पादों को महिला समूहों से जोड़कर उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की मजबूत व्यवस्था तैयार की जाती है, तो घरों में मौजूद हुनर को नियमित आमदनी में बदला जा सकता है। इस पहल की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब बाजार में बनी पहचान का आर्थिक लाभ गांव की महिलाओं और स्थानीय उत्पादकों तक भी पहुंचे।

Location :  Sultanpur

Published :  25 September 2026, 1:35 PM IST

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