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चार करोड़ का विकास कोष (Img: Dynamite News)
Sultanpur: उत्तर प्रदेश के जनपद सुलतानपुर के धनपतगंज ब्लॉक में करीब चार करोड़ रुपये की विकास निधि को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने कार्ययोजना तैयार करने में कथित मनमानी, खुली बैठक के बिना बजट और प्रस्ताव तैयार करने तथा ब्लॉक प्रमुख के कथित फर्जी हस्ताक्षर के जरिए धनराशि निकालने की कोशिश के आरोप लगाए हैं।
बुधवार को वार्ड नंबर 52 के क्षेत्र पंचायत सदस्य ऋषि भद्र सिंह के नेतृत्व में कई सदस्यों ने जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपनी शिकायतों से संबंधित ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है।
क्षेत्र पंचायत सदस्यों का आरोप है कि चालू वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार करने के लिए खुली बैठक नहीं बुलाई गई। इसके बावजूद बजट और विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। सदस्यों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्ययोजना बनाने में सभी संबंधित सदस्यों की भागीदारी जरूरी है।
उनका कहना है कि विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाई जा सकें। सदस्यों ने आरोप लगाया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्ययोजना तैयार करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने ब्लॉक प्रमुख के कथित फर्जी हस्ताक्षर के जरिए क्षेत्र पंचायत के खाते में जमा करीब चार करोड़ रुपये निकालने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया है। सदस्यों के अनुसार, ब्लॉक प्रमुख काफी समय से बाहर हैं। ऐसे में उनके हस्ताक्षर के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सदस्यों ने मांग की है कि खाते से धनराशि निकालने की प्रक्रिया की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं नियमों के विपरीत धन निकालने का प्रयास तो नहीं किया गया। उन्होंने जांच पूरी होने तक करीब चार करोड़ रुपये की धनराशि के आहरण पर रोक लगाने की मांग भी की है। फिलहाल, कथित फर्जी हस्ताक्षर और धन निकासी की कोशिश से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने 31 जनवरी को हुई बैठक की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि बैठक के दौरान पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया और महज 15 मिनट में जबरन प्रस्ताव पारित करा दिए गए। सदस्यों ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से पारित होने चाहिए।
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ऋषि भद्र सिंह समेत कई क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के विरोध में लिखित इस्तीफा सौंपने की बात कही है। सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं और विकास निधि के इस्तेमाल में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि सभी ग्राम सभाओं और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की भागीदारी से नई कार्ययोजना तैयार कराई जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक करीब चार करोड़ रुपये के आहरण पर रोक लगाई जाए।
Location : Sultanpur
Published : 14 October 2026, 9:36 PM IST