श्रावस्ती की रेल वाली हसरत होगी पूरी: 50 फीसदी जमीन रेलवे के नाम, टेंडर प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार
बहराइच से खलीलाबाद के बीच बिछने वाली नई रेल लाइन अब फाइलों से निकलकर धरातल पर रफ्तार पकड़ रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए 50 फीसदी जमीन का अधिग्रहण हो चुका है और वन विभाग से जुड़ी अड़चनें भी दूर कर ली गई हैं। यह खबर विशेष रूप से श्रावस्ती के लिए ऐतिहासिक है...
Balrampur: तराई के पिछड़े जिलों की तकदीर बदलने वाली बहराइच-श्रावस्ती-बलरामपुर-खलीलाबाद नई रेल लाइन परियोजना अब धरातल पर उतरने को बेताब है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की ताजा प्रगति को लेकर पूर्व सांसद दद्दन मिश्र को आश्वस्त किया है कि काम की राह में आने वाली बाधाएं अब छंट चुकी हैं। रेल मंत्री के मुताबिक, इस लंबी रेल लाइन के लिए आवश्यक कुल भूमि में से लगभग आधी जमीन का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है, जो इस प्रोजेक्ट की गति के लिहाज से एक बड़ी कामयाबी है।
रेल लाइन किसी जीवन रेखा से कम न होगी
इस परियोजना का सबसे भावनात्मक पहलू श्रावस्ती जनपद से जुड़ा है, जहां आजादी के इतने दशकों बाद भी रेल की सीटी नहीं गूंजी है। भगवान बुद्ध की तपोस्थली होने के बावजूद विकास की दौड़ में पीछे छूटे इस जिले के लिए यह रेल लाइन किसी जीवन रेखा से कम नहीं होगी।
पूर्व सांसद दद्दन मिश्र ने हाल ही में रेल मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर प्रोजेक्ट की धीमी चाल पर चिंता जताई थी और बताया था कि श्रावस्ती की कई पीढ़ियों ने आज तक अपने जिले में रेलगाड़ी नहीं देखी है। इसी दबाव का असर है कि अब रेल मंत्रालय ने वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया को भी क्लीयर कर दिया है। प्रशासनिक स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया भी अंतिम चरणों में है, जिसका सीधा अर्थ है कि जल्द ही खेतों में रेल की पटरियां बिछाने का काम मशीनों के शोर के साथ शुरू हो जाएगा।
रेल मंत्री के पत्र से स्पष्ट है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता पर रख रही है ताकि पर्यटन और व्यापार के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण इस बेल्ट को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सके। इस सकारात्मक अपडेट के बाद क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनका 'ट्रेन का सफर' महज एक सपना नहीं बल्कि हकीकत होगा।