संसद में समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने रुपये की गिरती कीमत को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनकी बहस भी देखने को मिली। विपक्ष ने इसे गंभीर आर्थिक मुद्दा बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की।

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव (Img: Internet)
New Delhi: देश की संसद में उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब आजमगढ़ के सांसद और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता धर्मेंद्र यादव ने डॉलर के मुकाबले लगातार गिरते रुपये का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सीधा हमला बोलते हुए कई तीखे सवाल किए। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा टोके जाने पर दोनों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल और भी गरमा गया।
सदन में बोलते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि वह वित्त राज्य मंत्री का जवाब ध्यान से सुन रहे थे, लेकिन जो बातें सामने आ रही हैं, वह देश की चिंता बढ़ाने वाली हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब रुपये की कीमत गिरती है तो देश की साख भी प्रभावित होती है। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आज रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रहा है, तो क्या देश की साख भी गिर रही है?
आज डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच चुका है।
संसद में आज इस मुद्दे पर माननीय वित्त मंत्री जी से जानकारी मांगी,
यह केवल एक मुद्रा की गिरावट नहीं है, बल्कि यह भाजपा सरकार की दिशाहीन आर्थिक नीतियों का प्रमाण है। pic.twitter.com/C67emLvqri
— Dharmendra Yadav (@MPDharmendraYdv) March 30, 2026
धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय सरकार कुछ और वादे करती है और नीतियां बनाते समय कुछ और करती है। उन्होंने कहा कि एक समय रुपये की कीमत करीब 60 प्रति डॉलर थी, जो अब बढ़कर 94 के करीब पहुंच गई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति का संकेत है।
वित्त राज्य मंत्री द्वारा दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और फिलीपींस की मुद्राओं का उदाहरण देने पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार तुलना ऐसे देशों से करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि भारत की तुलना डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी मजबूत मुद्राओं से कब होगी। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भ्रामक तस्वीर पेश की जा रही है।
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इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा और टकराव की स्थिति बनी रही। स्पीकर द्वारा हस्तक्षेप किए जाने पर भी धर्मेंद्र यादव अपनी बात पर अड़े रहे, जिससे बहस और तीखी हो गई। विपक्ष ने इसे गंभीर आर्थिक मुद्दा बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की।