
तिरंगा फहराते हुए शहीद हो गए रामचंद्र विद्यार्थी (Img: Dynamite News)
Deoria: आजादी की कहानी सिर्फ बड़े नेताओं और आंदोलनों की कहानी नहीं है। इसके पन्नों में ऐसे बच्चों की कुर्बानी भी दर्ज है, जिन्होंने उम्र की परवाह किए बिना अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। देवरिया के रामचंद्र विद्यार्थी ऐसे ही बाल क्रांतिकारी थे, जिन्होंने महज 13 साल की उम्र में तिरंगे के लिए अपनी जान दे दी।
14 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन का असर पूरे देश में था। इसी दौर में रामचंद्र विद्यार्थी अपने साथियों के साथ देवरिया जिला मुख्यालय पहुंचे। उनके मन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विरोध और देश को आजाद देखने का जज्बा था।
देवरिया कचहरी परिसर में उस समय अंग्रेजी हुकूमत का यूनियन जैक लगा हुआ था। रामचंद्र विद्यार्थी अपने साथियों के साथ कचहरी की छत तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने वहां लगा अंग्रेजों का झंडा उतार दिया और उसकी जगह तिरंगा फहरा दिया। अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें रोकने और पीछे हटने की चेतावनी दी। लेकिन 13 साल का यह बालक अपने फैसले से पीछे नहीं हटा। उसके हाथ में तिरंगा था और दिल में देश को आजाद देखने का सपना।
रामचंद्र विद्यार्थी के हौसले से अंग्रेज अधिकारी बौखला गए। इसके बाद अंग्रेजी सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। गोलियां चलती रहीं, लेकिन रामचंद्र विद्यार्थी तिरंगे के साथ डटे रहे। बताया जाता है कि वह ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करते हुए शहीद हो गए। जिस उम्र में बच्चे स्कूल और खेलकूद की दुनिया में होते हैं, उस उम्र में रामचंद्र विद्यार्थी ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उनकी शहादत आज भी देवरिया के लोगों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
रामचंद्र विद्यार्थी का जन्म 1 अप्रैल 1929 को देवरिया के नौतन हथियागढ़ गांव में हुआ था। वह बसंतपुर धूसी स्थित विद्यालय में पढ़ते थे। महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान ने उनके भीतर भी देशभक्ति की भावना को मजबूत किया। आज उनकी स्मृति में देवरिया में शहीद स्मारक मौजूद है। बसंतपुर धूसी का विद्यालय भी उनके नाम से जुड़ा है।
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रामचंद्र विद्यार्थी की कहानी बताती है कि आजादी की कीमत सिर्फ इतिहास की किताबों में दर्ज तारीखों से नहीं समझी जा सकती। इसके पीछे उन अनगिनत लोगों का बलिदान है, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 13 साल के इस बाल शहीद की कहानी नई पीढ़ी को याद दिलाती है कि तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि उन वीरों के सपनों और बलिदान की निशानी है, जिन्होंने देश को आजाद देखने के लिए अपनी जान तक दे दी।
Location : Deoria
Published : 14 August 2026, 8:07 PM IST