राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार चढ़ावा चोरी, कैमरे के सामने बंटती थी रकम, अनुकल्प-लवकुश के मास्टर प्लान ने सबको हिलाया!

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी जांच में सामने आईं लगातार कई गतिविधियों ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। सीसीटीवी, पूछताछ और जांच के दौरान मिले संकेतों ने ऐसी परतें खोली हैं, जिनसे पूरे मामले की तस्वीर बदलती दिख रही है। आखिर जांच में ऐसा क्या मिला?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 July 2026, 8:18 AM IST

Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावे) की राशि पर डाका डालने वाले गिरोह को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच टीम (SIT) और पुलिस की तफ्तीश में यह साफ हो गया है कि पवित्र मंदिर के भीतर आस्था के पैसे को बेहद शातिर और सुनियोजित तरीके से लूटा जा रहा था। इस पूरे खेल का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि गिरोह ने महज 40 दिनों के भीतर एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल 70 बार चोरी की वारदातों को अंजाम दिया।

अविनाश शुक्ला था 'मुख्य मोहरा', सीसीटीवी में 50 बार कैद

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे गिरोह ने मिलकर चोरी करने की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला नाम के आरोपी को सौंप रखी थी। सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से की गई जांच और पुलिस की विवेचना में यह अकाट्य साक्ष्य मिला है कि कुल 70 वारदातों में से करीब 50 बार अकेले अविनाश शुक्ला ने ही दान की रकम पार की थी।

जब भी अविनाश पैसों पर हाथ साफ करता था, गिरोह के बाकी सदस्य उसके आसपास इस तरह खड़े हो जाते थे ताकि किसी बाहरी व्यक्ति या सुरक्षाकर्मी की नजर उस पर न पड़े। वे अविनाश को पूरी तरह कवर करके 'ह्यूमन शील्ड' (मानवीय ढाल) बना लेते थे। अविनाश के अलावा, मौका पाकर मनीष और रमाशंकर नाम के आरोपियों ने भी कई बार रकम पार की और बाद में सभी आपस में इसका बंटवारा कर लेते थे। पुलिस रिमांड के दौरान खुद अविनाश ने कबूल किया है कि गैंग में रकम उड़ाने का मुख्य जिम्मा उसी का था।

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अनुकल्प और लवकुश रचते थे साजिश, टिन्नू-सुभाष देते थे संरक्षण

इस पूरे महाघोटाले और चोरी के पीछे असली दिमाग अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा का था। ये दोनों ही इस खेल के असली 'मास्टरमाइंड' थे, जो हर दिन यह तय करते थे कि चोरी की वारदात को किस तरह, किस समय और कैसे अंजाम देना है।

इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्हें टिन्नू यादव और गणनाकर्मी (काउंटिंग स्टाफ) सुभाष श्रीवास्तव का पूरा शह और संरक्षण प्राप्त था। टिन्नू और सुभाष का काम यह सुनिश्चित करना था कि जब गिरोह के सदस्य पैसे चुरा रहे हों, तब किसी दूसरे की नजर उन पर न जाए। वे एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे थे ताकि यह अवैध धंधा बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

हर दिन दो से तीन बार साफ होता था हाथ

एसआईटी और पुलिस की रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे लगभग हर रोज दो बार चढ़ावे की रकम चोरी करते थे। आरोपियों ने पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान खुद स्वीकार किया कि वे रोजाना कम से कम दो बार और अनुकूल परिस्थिति होने पर दिन में तीन बार भी हाथ साफ कर देते थे। हालांकि, कभी-कभार सुरक्षा या भीड़ की वजह से रकम पार करना मुश्किल भी होता था। यह काला खेल तब से अनवरत चल रहा था, जब से इन सभी आरोपियों को वहां काम पर लगाया गया था।

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एसआईटी की जांच अंतिम दौर में, पुलिस करेगी लंबी विवेचना

इस मामले में साक्ष्यों को मजबूत करने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। फुटेज की विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद आरोपियों के खिलाफ सबूत और पुख्ता हो गए हैं। वर्तमान में एसआईटी (SIT) की विस्तृत जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही इसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी। वहीं दूसरी ओर, पुलिस की कानूनी विवेचना अभी लंबी चलेगी ताकि अदालत में आरोपियों के खिलाफ ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जा सके जिससे उनका बच निकलना नामुमकिन हो।

Location :  Ayodhya

Published :  12 July 2026, 8:18 AM IST