
राम मंदिर (Img- Pinterest)
Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ती अगाध आस्था के समानांतर एक बेहद कड़वा सच आकार ले रहा है। मंदिर के चढ़ावे में लगी करोड़ों की सेंधमारी का सच अब एसआईटी (SIT) की फाइलों से बाहर आ चुका है, लेकिन इंसाफ का पहिया रसूख की ऊंची दीवारों के आगे आकर थम गया है।
जांच टीम ने साफ किया है कि ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में संदेहास्पद और लापरवाही से भरी रही, फिर भी पुलिस कार्रवाई करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही है।
एसआईटी की जांच में यह परत खुली है कि दान राशि की गणना, निगरानी और उसे सुरक्षित बैंक तक पहुंचाने के लिए जो नियम-कायदे तय थे, उन्हें अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ मिलकर अपनी सहूलियत के हिसाब से बदल दिया था। इसी 'रणनीतिक चूक' का फायदा उठाकर चोरों ने करोड़ों रुपये पार कर दिए।
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चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिखित हेरफेर को साजिश का सीधा संकेत मानने के बावजूद पुलिस ने अनिल मिश्रा से केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पूछताछ की है। क्या कानून की देवी की आंखों पर बंधी पट्टी रसूखदारों का चेहरा देखकर और मोटी हो जाती है?
इस महाघोटाले के तार केवल लापरवाही तक सीमित नहीं हैं। ट्रस्ट के पूर्व आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का अचानक अयोध्या छोड़कर चले जाना और वापसी पर चुप्पी साध लेना कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है।
वहीं दूसरी तरफ, इस काली कमाई को सफेद करने का खेल भी जोरों पर था। मामले से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने अपनी पत्नी पूनम देवी के नाम पर 'सौंदर्य कांस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स' जैसी डमी फर्म खड़ी की, जिसका टर्नओवर महज एक साल में 47.66 लाख रुपये पार कर गया।
अयोध्या पुलिस की सुस्ती यह साफ बयां करती है कि वह अपराधियों को पकड़ने के लिए कानून की किताबों से ज्यादा 'ऊपर' से मिलने वाले सियासी और प्रशासनिक इशारों पर निर्भर है। जब तक बड़े नामों पर हाथ डालने का साहस नहीं दिखाया जाएगा, तब तक आस्थावान भक्तों की जेब से निकला एक-एक रुपया इसी तरह रसूखदारों की फाइलों में दफन होता रहेगा।
Location : Ayodhya
Published : 17 July 2026, 9:31 AM IST
Topics : ayodhya news Ram Mandir SIT Investigation UP News