राम मंदिर दान पेटी से चोरी पर SIT का बड़ा खुलासा, ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय, उठे गंभीर सवाल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट ने ट्रस्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पूर्व महासचिव चंपत राय को लापरवाही का दोषी माना गया है, जबकि अनिल मिश्रा की भूमिका पर कानूनी शिकंजा कसने के पूरे आसार हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 August 2026, 10:47 AM IST

Ayodhya: एसआईटी की फाइनल जांच रिपोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर मचे प्रशासनिक भूचाल को सतह पर ला दिया है। मंदिर में हुई करोड़ों रुपये की चढ़ावा चोरी के मामले में जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके बाद प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण में जहां शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है, वहीं कुछ चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसने के पूरे आसार बन गए हैं।

चंपत राय की जवाबदेही तय: प्रशासनिक चूक पर बड़ा सवाल

जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व महासचिव चंपत राय को सीधे तौर पर प्रबंधकीय लापरवाही का दोषी माना गया है। हालांकि, एसआईटी को उनकी किसी भी आपराधिक साजिश में संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं, जिसके चलते उनके खिलाफ क्रिमिनल एक्शन की संभावना नहीं है। बावजूद इसके, उनके कार्यकाल के दौरान नाक के नीचे करोड़ों रुपये की हेराफेरी होना उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। चूंकि वह पहले ही अपना इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर उनकी भूमिका का चैप्टर लगभग समाप्त माना जा रहा है, लेकिन यह मामला शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के लिए एक बड़ा सबक है।

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अनिल मिश्रा पर साजिश का शक, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा आते दिख रहे हैं, जिन पर कानूनी शिकंजा कसना लगभग तय माना जा रहा है। एसआईटी के मुताबिक, दान राशि की गणना प्रक्रिया और बैंकों के साथ हुए एमओयू (समझौता ज्ञापनों) में मुख्य हस्ताक्षर उन्हीं के थे। आरोप है कि उन्होंने तय नियमों और शर्तों को दरकिनार कर अपने स्तर पर बदलाव किए थे। हालांकि इस्तीफा स्वीकार होने से विभागीय औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला हुआ है, जिस पर अंतिम निर्णय उच्च स्तर के निर्देशों के बाद लिया जाएगा।

लापरवाही की जड़ें: आउटसोर्सिंग और बैंक की भूमिका पर प्रहार

एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट में दान गणना की पुरानी व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गई हैं। रिपोर्ट में इस बात पर गहरी आपत्ति जताई गई है कि पवित्र और संवेदनशील गणना कार्य के लिए हाउसकीपिंग जैसी आउटसोर्सिंग कंपनियों के कर्मचारियों को क्यों लगाया गया था। जांच एजेंसी ने इसके लिए सीधे तौर पर बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी आड़े हाथों लिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई है कि भविष्य में इस तरह की चूक से बचने के लिए केवल बैंक के नियमित और भरोसेमंद कर्मचारियों को ही गिनती की प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

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पारदर्शिता और सुरक्षा की नई रूपरेखा

जांच रिपोर्ट महज दोष तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने भविष्य के लिए एक मजबूत सुरक्षा चक्र की रूपरेखा भी तैयार की है। एसआईटी ने खुलासा किया है कि मंदिर में अधिकांश भर्तियां सिफारिशों के आधार पर की गई थीं, जिससे आंतरिक सुरक्षा और व्यवस्था कमजोर हुई। अब एजेंसी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता के आधार पर हों। इसके साथ ही, दान पेटियों से लेकर गिनती कक्ष तक सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और कर्मचारियों के लिए विशिष्ट ड्रेस कोड जैसी सख्त गाइडलाइन लागू करने के सुझाव दिए गए हैं।

Location :  Ayodhya

Published :  19 August 2026, 10:47 AM IST