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Pratapgarh: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कथित शत्रु संपत्ति को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कुंडा तहसील के वजीरपुर के बाद अब बाबागंज क्षेत्र के गुजवर गांव में पाकिस्तान गए लोगों की जमीन पर कथित कब्जे का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि देश के विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए परिवारों की दर्जनों बीघा कीमती जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने अपने नाम दर्ज करा लिया। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से की गई है।
महेशगंज थाना क्षेत्र के गुजवर गांव निवासी लवन्नत कुमार पुत्र स्वर्गीय पहरुराम ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में उन्होंने गांव के मूल निवासी अखलाक अहमद पुत्र वसीर अहमद और भगेलू उर्फ अच्छे पुत्र बाबू के परिवारों की जमीन का मामला उठाया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, देश के बंटवारे के समय दोनों परिवार अपने परिजनों के साथ पाकिस्तान चले गए थे। आरोप है कि उनके जाने के बाद गांव में छूटी दर्जनों बीघा जमीन को कुछ लोगों ने राजस्व कर्मियों से कथित मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने नाम दर्ज करा लिया।
आरोप यह भी है कि राजस्व अभिलेखों में जमीन को अपनी पैतृक संपत्ति दर्शाकर नामांतरण कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अभिलेखों में कथित हेरफेर के बाद संबंधित लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। उन्होंने प्रशासन से पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
शिकायती पत्र में मांग की गई है कि जांच के आधार पर संबंधित भूमि को नियमानुसार शत्रु संपत्ति घोषित करने की कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि अवैध कब्जे और दस्तावेजों में धोखाधड़ी की पुष्टि होती है, तो जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
मामले में राजस्व अभिलेखों, जमीन के स्वामित्व और नामांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों की सच्चाई और भूमि की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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प्रतापगढ़ के वजीरपुर में शत्रु संपत्ति से जुड़ा मामला पहले ही चर्चा में रहा है। अब गुजवर गांव से भी इसी तरह के आरोप सामने आने के बाद यह विवाद फिर सुर्खियों में है। शिकायतकर्ता ने मामले को शासन स्तर तक पहुंचाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हालांकि, अभी आरोपों की पुष्टि और जमीन की कानूनी स्थिति को लेकर प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित भूमि शत्रु संपत्ति के दायरे में आती है या नहीं।
फिलहाल, पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई अहम होगी। राजस्व रिकॉर्ड की जांच और संबंधित पक्षों के तथ्यों के आधार पर ही जमीन के स्वामित्व, कथित कब्जे और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।
Location : Pratapgarh
Published : 11 October 2026, 4:51 PM IST
Topics : Enemy Property land dispute pratapgarh news Revenue Department Investigation Uttar Pradesh News