हिंदी
बीएसए की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल (Img: Dynamite News)
Pratapgarh: पर्यावरण बचाने के लिए एक तरफ पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं प्रतापगढ़ के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय परिसर में पुराने हरे पेड़ों को काटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छंटाई के नाम पर करीब दो दशक पुराने कई पेड़ों को कटवा दिया गया।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी है। अब लोग इस मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मामला बेल्हा स्थित बीएसए कार्यालय परिसर का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, परिसर में नीम, सागौन, शीशम और यूकेलिप्टस समेत कई प्रजातियों के पेड़ वर्षों से मौजूद थे। आरोप है कि इन पेड़ों को छंटाई के नाम पर काट दिया गया, जबकि उनकी उम्र करीब 20 साल बताई जा रही है।
इस मामले में वर्तमान बीएसए देवव्रत सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, पेड़ों की कटाई किस आदेश के तहत हुई और इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
ये भी पढ़ें- मेरठ सांप कांड: रविता और अमरदीप को फांसी, अमित हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला; जानिए कैसे खुला था राज
छंटाई के नाम पर काटे गए हरे पेड़ (Img: Dynamite News)
बीएसए कार्यालय के पास स्थित आवास विकास कॉलोनी के निवासियों ने पेड़ों की कटाई पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में हरियाली बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये पेड़ लंबे समय से परिसर की हरियाली का हिस्सा थे और गर्मी के दिनों में छाया भी देते थे। लोगों ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पेड़ों को काटने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या नियमों का पालन किया गया।
20 साल पुराने पेड़ कटवाने पर सवाल, डाइनामाइट न्यूज़ का कैमरा देखते ही क्यों भड़के BSA?
#Pratapgarh #trees #BSA #DynamiteNews @pratapgarhpol @dmpratapgarh https://t.co/4iBswvUFt6
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) October 16, 2026
स्थानीय नागरिकों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में किसी की मृत्यु होने पर बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर में स्थित बाग में अंतिम संस्कार से जुड़ी कुछ रस्में पूरी की जाती थीं। उनके अनुसार, पेड़ों की कटाई से इस परंपरा से जुड़े लोगों की भावनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
इसी वजह से मामला केवल हरियाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था और वर्षों से चली आ रही परंपराओं से भी जुड़ गया है।
ये भी पढ़ें- Hamirpur: आशा कार्यकर्ताओं का बड़ा ऐलान! मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल
स्थानीय नागरिकों और कॉलोनीवासियों ने जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई से जुड़े आदेश, अनुमति और जिम्मेदारी की जांच होनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
खबर के मुताबिक, डाइनामाइट न्यूज़ की टीम जब मामले की पड़ताल करने बीएसए कार्यालय पहुंची, तो रिपोर्टर और कैमरामैन को देखकर बीएसए देवव्रत सिंह नाराज हो गए और वीडियो बनाने से रोकने लगे। बाद में वह मामले पर सफाई देते भी नजर आए।
Location : Pratapgarh
Published : 16 October 2026, 4:16 PM IST