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रविता और अमरदीप को फांसी (img: Dynamite News)
Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित अमित कश्यप उर्फ मिक्की हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को दोषी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई। दोनों पर अमित की हत्या करने के बाद मामले को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की साजिश रचने का आरोप था। अदालत ने 7 अक्टूबर को ही दोनों को हत्या का दोषी करार दिया था। अब सजा के ऐलान के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव के इस मामले में जेल में बंद रविता और अमरदीप की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेशी कराई गई। सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, सजा के सवाल पर रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल की बात कही, जबकि अमरदीप ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी का जिक्र किया। सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों भावुक हो गए।
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यह मामला 17 अप्रैल 2025 की रात का है। अमित कश्यप उर्फ मिक्की की उसके घर में मौत हो गई थी। शुरुआत में मामला सांप के काटने से हुई मौत का लग रहा था, लेकिन जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पुलिस को हत्या की आशंका की ओर मोड़ दिया।
अभियोजन के मुताबिक, रविता और अमरदीप ने मिलकर अमित की हत्या की साजिश रची थी। आरोप था कि अमित की गला घोंटकर हत्या की गई और फिर मौत को सर्पदंश का परिणाम दिखाने के लिए बिस्तर पर सांप छोड़ दिया गया।
पुलिस जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपियों की कॉल डिटेल अहम साक्ष्य बने। पोस्टमार्टम में अमित की मौत का कारण गला घोंटना सामने आया। जांच में रविता और अमरदीप के बीच संपर्क से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की गई।
इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए। इन्हीं साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने 7 अक्टूबर को दोनों को हत्या का दोषी ठहराया और 16 अक्टूबर को सजा सुनाई।
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इस हत्याकांड की सुनवाई लंबे समय तक चली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले में 12 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने हत्या और उसे सर्पदंश का रूप देने की कथित साजिश से जुड़े साक्ष्य रखे।
अदालत ने दोनों को दोषी ठहराने के बाद सजा के सवाल पर अलग से सुनवाई की। शुक्रवार को मृत्युदंड के ऐलान के साथ मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव सामने आया।
अमित की मां मुनेश देवी लंबे समय से दोनों दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रही थीं। बेटे की हत्या के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्होंने कहा था कि उनके बेटे के साथ जो हुआ, उसके लिए दोषियों को फांसी मिलनी चाहिए।
अमित की मौत के करीब छह महीने बाद उसके दिव्यांग पिता विजयपाल का भी निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मुनेश देवी पर आ गई। अब वह अपने तीन पोते-पोतियों अनिकेत, अनुष्का और गौरी की परवरिश, पढ़ाई और भविष्य की चिंता कर रही हैं।
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अमित अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ गया। परिवार के मुताबिक, तीनों बच्चे अपनी मां रविता से मिलने के लिए तैयार नहीं हैं। इस स्थिति ने परिवार की भावनात्मक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
सजा के ऐलान के साथ ही बच्चों के भविष्य और उनकी देखभाल का सवाल भी अहम हो गया है। परिवार पहले ही बेटे और फिर पति को खोने का दुख झेल चुका है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है।
रविता और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के मामलों में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि सहित निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसलिए सजा सुनाए जाने और उस पर अंतिम अमल के बीच कानूनी चरण बाकी रहते हैं।
मेरठ का यह हत्याकांड उस साजिश के कारण चर्चा में आया, जिसमें हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश किए जाने का आरोप था। अदालत के फैसले ने मामले को नया मोड़ दिया है, जबकि अमित के परिवार के लिए अब बच्चों का भविष्य सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।
Location : Meerut
Published : 16 October 2026, 3:53 PM IST