घुटनों के बल 2400 KM की शिव कांवड़ यात्रा! 65 वर्षीय शिवभक्त हरपाल नाथ की 411 दिन की तपस्या ने सबको किया भावुक

मुज़फ़्फ़रनगर में 65 वर्षीय हरपाल नाथ की अनोखी कांवड़ यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है। वह हरिद्वार से 33 लीटर गंगाजल लेकर घुटनों के बल 2400 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। आखिर 411 दिन तक चलने वाली इस कठिन तपस्या के पीछे क्या है उनकी आस्था?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 3 August 2026, 12:42 PM IST
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Muzaffarnagar: कांवड़ यात्रा-2026 में जहां लाखों शिवभक्त पैदल अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं रविवार रात मुज़फ़्फ़रनगर में एक ऐसी कांवड़ यात्रा लोगों की आस्था का केंद्र बन गई है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया। मेरठ निवासी 65 वर्षीय शिवभक्त हरपाल नाथ हरिद्वार से 33 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर घुटनों के बल रेंगते हुए अपनी कठिन यात्रा पूरी कर रहे हैं।

चार पहियों वाली विशेष कांवड़ के साथ कर रहे कठिन यात्रा

हरपाल नाथ की यह यात्रा सामान्य कांवड़ यात्रा नहीं है। वह चार पहियों वाली एक विशेष रेहड़ीनुमा कांवड़ को अपने हाथों के सहारे खींचते हुए रेंगकर आगे बढ़ते हैं। इसी कांवड़ में गंगाजल के साथ उनकी दैनिक जरूरत का सामान भी रखा हुआ है। ऊपर बाबा भोलेनाथ की ध्वजा के साथ तिरंगा भी लहरा रहा है, जो उनकी श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति दोनों का संदेश देता है।

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411 दिनों में तय करेंगे 2400 किलोमीटर का सफर

मुज़फ़्फ़रनगर से गुजरते समय हरपाल नाथ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रुकते नजर आए। कोई उनका वीडियो बनाता दिखा तो कोई उनके चरण स्पर्श कर उनका हौसला बढ़ाता रहा। घुटनों के बल धीरे-धीरे रेंगते हुए उनकी यह तपस्या लोगों को सहज ही प्रभावित कर रही थी।

रास्ते भर मिल रहा श्रद्धालुओं का सहयोग

हरपाल नाथ ने बताया कि यह उनकी तीसरी ऐसी कठिन कांवड़ यात्रा है। इस बार उनकी पूरी यात्रा करीब 411 दिनों तक चलेगी, जिसमें वे लगभग 2400 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यात्रा के दौरान वह मुज़फ़्फ़रनगर के संभलहेड़ा स्थित शिवधाम, मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन) और नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।

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उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। उनका विश्वास है कि जब तक शरीर में प्राण और बाबा भोलेनाथ की कृपा बनी रहेगी, तब तक वह इसी प्रकार कठिन कांवड़ यात्राएं करते रहेंगे।

रास्ते भर श्रद्धालु उन्हें पानी, भोजन और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। हरपाल नाथ का कहना है कि यही शिवभक्तों की सबसे बड़ी पहचान है कि वे एक-दूसरे की सेवा को ही भगवान शिव की सेवा मानते हैं।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  3 August 2026, 12:42 PM IST

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