मथुरा के छाता क्षेत्र में हुए बवाल की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस को हाईवे से तमंचों से चली गोलियों के खोखे, मैगजीन और आंसू गैस के सेल मिले हैं। वहीं, पुलिस की रबर बुलेट से एक नाबालिग की आंख घायल हो गई, जिससे प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस एक्शन पर उठे बड़े सवाल (Image Source: Google)
Mathura: उत्तर प्रदेश के मथुरा के छाता क्षेत्र में हुए बवाल की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। रविवार को हाईवे से जुटाए गए साक्ष्यों में तमंचों से चलाई गई गोलियों के खोखे, मैगजीन और टीयर गैस सेल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा ईंट-पत्थर, डंडे और अन्य हथियार भी मौके से मिले हैं, जो हिंसा की गंभीरता को दर्शाते हैं।
इस बवाल में प्रशासन और पुलिस की कुल आठ गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इनमें एडीएम प्रशासन, एसडीएम, पुलिस की गाड़ियां और अन्य अधिकारियों के वाहन शामिल हैं। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को 40 राउंड आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जबकि 32 रबर बुलेट भी चलाई गईं। पुलिस ने 15 संदिग्ध बाइकों को भी कब्जे में लिया है, जिनका इस्तेमाल उपद्रव में होने की आशंका है।
बवाल के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग में एक नाबालिग गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी आंख में रबर बुलेट लगने से हालत नाजुक बनी हुई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गई है।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हालात सामान्य होने के बाद भी सख्ती दिखाई। उनका कहना है कि न केवल प्रदर्शनकारियों बल्कि आम राहगीरों को भी निशाना बनाया गया। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने मारपीट के साथ मोबाइल फोन तक छीन लिए। हालांकि इस झड़प में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, लेकिन निर्दोष लोगों के घायल होने से प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
पूरे बवाल की जड़ गोरक्षक चंद्रशेखर महाराज उर्फ फरसा वाले बाबा की मौत को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि हाईवे पर ट्रकों की जांच के दौरान एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। हालांकि, इस घटना को लेकर हत्या की अफवाह फैल गई, जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
गुस्साए ग्रामीणों और समर्थकों ने शव को हाईवे पर रखकर करीब चार घंटे तक जाम लगाया और पुलिस के साथ टकराव हो गया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब पुलिस ने जाम हटाने की कोशिश की, जिसके बाद पथराव और तोड़फोड़ शुरू हो गई। इस हिंसा में 27 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। साथ ही अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है, जिससे क्षेत्र में शांति बहाल की जा सके।