इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कोविड से मौत पर नहीं रोक सकते मुआवजा, पत्नी को मिलेंगे 50 लाख

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोविड से मौत के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में कोरोना से मौत दर्ज होने पर सिर्फ आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने के कारण मुआवजा नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने सोनभद्र के डीएम का आदेश रद्द कर अर्चना सिंह को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का आदेश दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 28 October 2026, 3:57 PM IST

Allahabad News: कोरोना से जान गंवाने वाले सरकारी कर्मचारी के परिवार को मुआवजा देने से इनकार करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में मौत की वजह कोविड-19 दर्ज है, तो सिर्फ आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने के आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने सोनभद्र के जिलाधिकारी का आदेश रद्द करते हुए मृतक की पत्नी अर्चना सिंह को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

अर्चना सिंह के पति रवींद्र सिंह उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओबरा तापीय विद्युत परियोजना में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात थे। कोरोना महामारी के दौरान ड्यूटी करते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें 28 अप्रैल 2021 को सोनभद्र के लोढ़ी स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, उनकी एंटीजन जांच पॉजिटिव आई थी। इलाज के दौरान 5 मई 2021 को उनकी मौत हो गई। मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड में मौत की वजह कोविड-19 वायरल निमोनिया बताई गई थी। इसके बाद परिवार ने नियमानुसार अनुग्रह सहायता राशि पाने का दावा किया।

50 लाख रुपये की सहायता देने की हुई थी संस्तुति

रवींद्र सिंह की मौत के बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओबरा परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने उनकी पत्नी अर्चना सिंह को 50 लाख रुपये की सहायता देने की संस्तुति की थी। जिला प्रशासन की ओर से भी भुगतान को मंजूरी दी गई थी।

हालांकि, बाद में सोनभद्र के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 16 नवंबर 2021 को आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज कर दिया। प्रशासन के इस फैसले से असंतुष्ट अर्चना सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आदेश को चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया डीएम का आदेश?

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में जब कोविड-19 संक्रमण और उससे संबंधित मौत का स्पष्ट उल्लेख है, तो केवल आरटी-पीसीआर रिपोर्ट न होने के आधार पर मुआवजे से इनकार करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि संबंधित सरकारी योजना में एंटीजन जांच सहित अन्य निर्धारित साक्ष्यों को भी मान्यता दी गई है। ऐसे में अस्पताल के रिकॉर्ड को नजरअंदाज करके पीड़ित परिवार को सहायता से वंचित नहीं किया जा सकता।

पीड़ित परिवार को मिलेगी 50 लाख रुपये की सहायता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र के डीएम के 16 नवंबर 2021 के आदेश को रद्द करते हुए अर्चना सिंह को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का आदेश दिया है। इस फैसले से उन मामलों में सरकारी रिकॉर्ड और उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित किया गया है, जहां तकनीकी दस्तावेज की कमी के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज कर दिया जाता है।

Location :  Allahabad

Published :  28 October 2026, 3:57 PM IST