Maharajganj: धूल में सोना खोजती ज़िंदगियां, सुनारी गली की महिलाओं की संघर्षभरी कहानी

महराजगंज के कोल्हुई कस्बे की सुनारी गली में रांची से आई गरीब महिलाएं धूल में छिपे सोने के कण तलाशकर अपनी आजीविका चला रही हैं। घंटों की मेहनत, स्वास्थ्य जोखिम और अनिश्चित कमाई के बावजूद मजबूरी उन्हें इस कठिन काम के लिए मजबूर कर रही है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 6 February 2026, 5:46 PM IST

Maharajganj: कोल्हुई कस्बे की सुनारी गली में हर दिन एक ऐसी जंग लड़ी जाती है, जिसमें हथियार नहीं बल्कि धूल और उम्मीदें होती हैं। यहां रांची से आई कई महिलाएं दुकानों के बाहर बिखरी धूल से सोने के कण खोजकर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रही हैं।

यह है पूरा मामला 

इन महिलाओं को स्थानीय लोग ‘सोनझरी’ या ‘घमेलावाली’ कहते हैं। सुबह होते ही ये सुनारों की दुकानों के सामने झाड़ू लगाकर धूल इकट्ठा करती हैं। जेवर बनाने, काटने-छांटने और पॉलिश के दौरान गिरने वाले बेहद बारीक सोने के कण धूल में मिल जाते हैं, जिन्हें ये महिलाएं अपने अनुभव से पहचान लेती हैं।

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धूल को घर ले जाकर पानी से धोना, छानना और पारंपरिक तरीकों से सोना अलग करना एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है। कई घंटे की मेहनत के बाद कभी थोड़ा-सा सोना हाथ लगता है, जिससे दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता है। कई बार मेहनत बेकार चली जाती है।

सोने की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इन महिलाओं की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आ रहा। धूल में झुककर काम करने से सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियां आम हो चुकी हैं, फिर भी मजबूरी उन्हें यही काम करने पर विवश करती है।

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यह कहानी सिर्फ धूल से सोना निकालने की नहीं, बल्कि उस समाज की हकीकत है जहां चमक-दमक के पीछे संघर्ष और गरीबी छिपी रहती है। कोल्हुई की सुनारी गली में ये महिलाएं हर दिन हमें याद दिलाती हैं कि असली मेहनत अक्सर सबसे अनदेखी जगहों पर होती

Location : 
  • Maharajganj

Published : 
  • 6 February 2026, 5:46 PM IST