कोल्हुई में पेट से जुड़ी जुड़वा बच्चियों का जन्म, दुर्लभ घटना की फैली चर्चा; पढ़ें पूरी खबर

महराजगंज के कोल्हुई स्थित एपेक्स हॉस्पिटल में पेट से जुड़ी जुड़वा बच्चियों का जन्म हुआ, जिसने पूरे इलाके में कौतूहल पैदा कर दिया। सिजेरियन डिलीवरी के दौरान सामने आई यह दुर्लभ स्थिति चिकित्सा विज्ञान के लिए भी चुनौती है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 January 2026, 1:46 PM IST

Maharajganj: कोल्हुई कस्बे स्थित एपेक्स हॉस्पिटल में शनिवार को एक बेहद दुर्लभ और हैरतअंगेज चिकित्सा घटना सामने आई, जिसने न सिर्फ अस्पताल स्टाफ बल्कि पूरे क्षेत्र को आश्चर्य में डाल दिया। यहां एक महिला ने पेट से जुड़ी जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया। इस असामान्य प्रसव के बाद अस्पताल परिसर में कौतूहल का माहौल बन गया और लोग इसे देखने व जानने के लिए उत्सुक नजर आए।

प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, बृजमनगंज क्षेत्र के करमहा चौराहा निवासी सनोज शर्मा अपनी पत्नी मंजू को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद एपेक्स हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद स्थिति को जटिल मानते हुए सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन) का निर्णय लिया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की देखरेख में ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।

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ऑपरेशन के दौरान सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

जब नवजात बच्चियों को बाहर निकाला गया, तो डॉक्टरों के साथ-साथ परिजन भी स्तब्ध रह गए। दोनों बच्चियां पेट के हिस्से से आपस में जुड़ी हुई थीं। मेडिकल भाषा में इसे कॉन्जॉइंड ट्विन्स (Conjoined Twins) कहा जाता है, जो लाखों में किसी एक गर्भावस्था में देखने को मिलता है। अस्पताल के संचालक डॉ. अरशद खान ने बताया कि यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ होती है और इसके लिए विशेष चिकित्सा प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

मां और बच्चियां सुरक्षित

ऑपरेशन के बाद मां मंजू और दोनों नवजात बच्चियां फिलहाल स्वस्थ बताई जा रही हैं। मंजू पहले से दो बेटियों की मां हैं, जिनकी उम्र 3 वर्ष और 5 वर्ष है। हालांकि परिवार में खुशी के साथ-साथ चिंता भी गहराई से जुड़ी हुई है। पिता सनोज शर्मा का कहना है कि बच्चियों का भविष्य और उनका इलाज सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

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विशेष संस्थान में इलाज की सलाह

डॉ. अरशद खान के अनुसार, जुड़वा बच्चियों को अलग करने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है और यह केवल बड़े, उच्च स्तरीय मेडिकल संस्थानों में ही संभव है। इसके लिए अनुभवी सर्जनों और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता होती है। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सलाह दी है कि बच्चियों को जल्द ही किसी बड़े मेडिकल कॉलेज या सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रेफर कराया जाए।

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  • Maharajganj

Published : 
  • 25 January 2026, 1:46 PM IST