
आरोपियों की अकूत संपत्ति खंगालने में जुटी पुलिस (Img- AI Generated)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब प्रशासन और पुलिस ने दोषियों के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि लखनऊ अग्निकांड के आरोपियों की कितनी संपत्ति है? पुलिस अब मुख्य आरोपी और बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला समेत अन्य आरोपियों की अवैध और वैध संपत्तियों का पूरा ब्यौरा जुटाने में लग गई है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि वीरेंद्र शुक्ला की लखनऊ और सीतापुर जिले में करोड़ों रुपये की बेनामी और व्यावसायिक संपत्तियां मौजूद हैं। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि इस आलीशान और नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई इमारत के पीछे कितनी काली कमाई छिपी है।
पुलिस की वित्तीय जांच सिर्फ बिल्डिंग मालिक तक ही सीमित नहीं है। अलीगंज पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों जैसे कि एनीमेशन और गेमिंग जोन कंपनी के संचालकों तथा पेट्स शॉप के मालिक की अचल व चल संपत्तियों की भी गहनता से तलाश कर रही है।
आरोपियों के बैंक खातों को खंगाला जा रहा है ताकि उनकी वित्तीय लेन-देन और आय के स्रोतों का मिलान किया जा सके। इस कार्रवाई के लिए पुलिस की टीमें रजिस्ट्री ऑफिस, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और अन्य राजस्व विभागों से लगातार संपर्क साधकर आधिकारिक दस्तावेज एकत्र कर रही हैं।
विवेचना के दौरान पुलिस को एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा मिला है। इस बहुमंजिला इमारत में सालों से नियमों को ठेंगा दिखाकर काम किया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि साल 2016 में एक फर्जी फायर एनओसी (NOC) तैयार की गई थी। इसी फर्जी एनओसी के सहारे रेजिडेंशियल (आवासीय) बिजली कनेक्शन को कमर्शियल (व्यावसायिक) कनेक्शन में बदलवा लिया गया था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतने सालों से इस व्यावसायिक इमारत का कोई इलेक्ट्रिक ऑडिट भी नहीं कराया गया था। एसआईटी (SIT) ने इस सिलसिले में जिला प्रशासन और विद्युत सुरक्षा विभाग के आला अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं।
अलीगंज पुलिस ने घटना स्थल का नजरी नक्शा तैयार कर केस डायरी में शामिल कर लिया है। इसके साथ ही एलडीए, नगर निगम और बिजली विभाग को पत्र लिखकर साल 2016 से लेकर अब तक के सभी दस्तावेज और टैक्स का ब्यौरा मांगा गया है। पुलिस यह भी जांच रही है कि मुख्य गेट पर क्या अवरोधक थे जिसके कारण आग इतनी तेजी से फैली।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद इस लापरवाही में शामिल सरकारी अधिकारियों पर गाज गिरना तय हो गया है। एलडीए ने इस मामले में संलिप्त पाए गए 6 पीसीएस (PCS) अफसरों के नाम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिए हैं, जबकि इससे पहले 19 कर्मचारियों के नाम भी भेजे जा चुके थे। मामले में अब तक 4 आरोपी जेल जा चुके हैं और 2 की तलाश जारी है।
Location : Lucknow
Published : 25 June 2026, 9:05 AM IST
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