महराजगंज में आमलकी एकादशी के अवसर पर बाबा खाटू श्याम की भव्य निशान यात्रा निकाली गई। सैकड़ों श्रद्धालु नंगे पांव और केसरिया निशान लेकर शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच भक्तों ने झूमकर बाबा के प्रति अपनी आस्था दिखाई।

महराजगंज में निकली बाबा खाटू श्याम की भव्य निशान यात्रा
Maharajganj: महाराजगंज जनपद में शुक्रवार को भक्ति का माहौल देखने को मिला, जहां "हारे हुए का सहारा" कहे जाने वाले बाबा खाटू श्याम की भव्य निशान यात्रा निकाली गई। आमलकी एकादशी के पावन मौके पर निकाली गई इस यात्रा में सैकड़ों भक्त नंगे पैर पवित्र केसरिया, नारंगी और लाल झंडे लेकर शामिल हुए।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, शहर की सड़कें भजनों, मंत्रों और ढोल की थाप से गूंज उठीं। भक्त जुलूस में आगे बढ़ते हुए नाचते हुए आगे बढ़े और जगह-जगह फूलों की बारिश से उनका स्वागत किया गया। कार्यक्रम का माहौल भक्ति और खुशी से भर गया।
भक्तों का मानना है कि बाबा खाटू श्याम को निशान चढ़ाने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, बाबा ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सिर कुर्बान कर दिया था और युद्ध में जीत का श्रेय भगवान कृष्ण को दिया था। इसी बलिदान और समर्पण की याद में आज भी निशान चढ़ाने की परंपरा कायम है।
आमलकी एकादशी पर बाबा के दर्शन का खास महत्व है। मंदिर में जाकर भक्तों को गाय का कच्चा दूध चढ़ाने से खास लाभ मिलता है। निशान पर भगवान कृष्ण और श्याम बाबा की तस्वीरें और मंत्र लिखे होते हैं। इस पर नारियल और मोर पंख भी बांधकर मंदिर में चढ़ाया जाता है।
महराजगंज: भक्ति और उल्लास के बीच निकली बाबा खाटू श्याम की भव्य निशान यात्रा। श्रद्धालुओं ने नंगे पांव केसरिया निशान लेकर हिस्सा लिया और भजन-ढोलों की गूंज से शहर भक्तिमय हो गया। #KhatuShyam #NishanYatra #MaharajganjFestival #ShyamBhakti #DevotionalEvent #IndianCulture pic.twitter.com/mKAcP9jD0S
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 27, 2026
निशान यात्रा में हर उम्र के भक्तों ने हिस्सा लिया। जवान, बूढ़े और बच्चे सभी भक्ति और खुशी के माहौल में नाचते हुए दिखे। सनातन धर्म में झंडे को जीत और आस्था का प्रतीक माना जाता है और यह भावना इस यात्रा में पूरी तरह से दिखाई दी।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। महाराजगंज की सड़कों पर भक्तों का उत्साह और अनुशासन देखकर लोग काफी प्रभावित हुए। भक्ति और श्रद्धा के इस सागर में डूबे भक्तों ने शहर के माहौल को पूरी तरह से जीवंत कर दिया।