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Fatehpur: बीमारी जब इंसान को घेर लेती है, तो सबसे पहले उम्मीदें टूटती हैं और फिर रिश्ते। फतेहपुर के खागा क्षेत्र से सामने आई यह कहानी किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं, जहां हालात इतने बेरहम हो गए थे कि 15 साल का एक बच्चा मौत के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था। शरीर जवाब दे रहा था, इलाज थक चुका था और सिस्टम की सीमाएं सामने थीं। ऐसे वक्त में अगर कोई ढाल बनकर खड़ा हुआ, तो वह थी मां।
एक किडनी के सहारे जिंदगी
दीपांशु श्रीवास्तव का बेटा अंश श्रीवास्तव जन्म से ही एक किडनी के सहारे जी रहा था। बचपन से ही दवाइयां, परहेज और अस्पताल उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके थे। वक्त बीतता गया, लेकिन किस्मत ने राहत नहीं दी। धीरे-धीरे उसकी इकलौती किडनी भी खराब हो गई। हालत इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अब अगर ट्रांसप्लांट नहीं हुआ, तो अंश को बचाना मुश्किल है।
जब अपनों ने छोड़ा साथ
परिवार में बैठकर चर्चा हुई। रिश्तेदारों से मदद मांगी गई, लेकिन बीमारी और खर्च का नाम सुनते ही सब पीछे हट गए। कोई बहाना बना गया, तो कोई चुपचाप दूरी बना बैठा। उस वक्त घर में सन्नाटा था और मां की आंखों में सिर्फ बेटे को बचाने की जिद।
मां का त्याग, जमीन तक बिक गई
दीपांशु श्रीवास्तव ने बिना देर किए फैसला लिया कि अगर बेटे को उनकी किडनी से जिंदगी मिल सकती है, तो इससे बड़ा धर्म कुछ नहीं। उन्होंने न सिर्फ किडनी दान करने का फैसला लिया, बल्कि इलाज के खर्च के लिए अपनी जमीन तक बेच दी। कुछ मदद सरकारी योजनाओं से मिली, लेकिन असली कीमत मां ने अपने शरीर और सपनों से चुकाई।
PGI में जिंदगी की वापसी
लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, यानी PGI में मां और बेटे का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन लंबा था, लेकिन सफल रहा। जब अंश को होश आया और उसे बताया गया कि अब वह ठीक है, तो उस पल की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।
आंखें नम कर देने वाली कहानी
आज मां और बेटा दोनों स्वस्थ हैं। यह सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि उस मां की कहानी है जिसने साबित कर दिया कि मां का दिल सच में दुनिया का सबसे मजबूत दिल होता है।
Location : Fatehpur
Published : 11 January 2026, 4:00 AM IST
Topics : fatehpur news Kidney Transplant Mother Love UP News