
पीड़ित ने संपूर्ण समाधान दिवस में लगाई गुहार
Budaun: जिले के बिसौली नगर से एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। फाइनेंस रिकवरी (Finance Recovery) के नाम पर दबंगई और लूट का आरोप लगने के बाद लोग हैरान हैं कि आखिर कानून के नाम पर इस तरह की मनमानी कैसे चल रही है। पीड़ित का आरोप है कि उसकी बाइक भी छीन ली गई, वो भी तब जब वह अपनी अधिकतर किस्तें चुका चुका था।
बदायूं जिले के बिसौली नगर से फाइनेंस रिकवरी के नाम पर दबंगई का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि उसने स्प्लेंडर बाइक की अधिकांश किस्तें समय पर जमा कर दी थीं, फिर भी 3 लोग खुद को रिकवरी एजेंट बताकर पहुंचे और बाइक जबरन ले गए।#Badaun #FinanceRecovery pic.twitter.com/bkS9NGmbio
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 18, 2026
बिसौली नगर निवासी युवक ने बताया कि उसने कुछ समय पहले स्प्लेंडर बाइक फाइनेंस पर खरीदी थी। उसने 24 किस्तों में से अधिकतर किस्तें समय पर जमा कर दी थीं और केवल कुछ ही किस्तें बाकी थीं। इसी बीच 23 फरवरी को तीन लोग उसके पास पहुंचे और खुद को फाइनेंस कंपनी का रिकवरी एजेंट बताया।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उससे कहा कि उसकी किस्तें पूरी नहीं हुई हैं और बाइक एजेंसी में जमा करनी होगी। इसके बाद उन्होंने 6 हजार रुपये की मांग की और साफ कहा कि अगर बाइक वापस चाहिए तो पैसे देने होंगे। जब पीड़ित ने पैसे देने से इनकार किया और किस्तों की जानकारी मांगी, तो आरोपियों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया।
आरोप है कि बहस बढ़ने पर तीनों ने मिलकर उसकी स्प्लेंडर बाइक जबरन छीन ली और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित पूरी तरह से परेशान हो गया और तुरंत थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां उसे कोई राहत नहीं मिली।
पीड़ित का कहना है कि थाने में शिकायत देने के बावजूद न तो कोई मुकदमा दर्ज हुआ और न ही कोई कार्रवाई की गई। इससे परेशान होकर वह शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचा और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।
पीड़ित ने दावा किया है कि जो लोग बाइक लेने आए थे, उनका किसी भी फाइनेंस कंपनी से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिसौली क्षेत्र में इस तरह के फर्जी रिकवरी एजेंटों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है।
जानकारों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन साफ कहती है कि कोई भी रिकवरी एजेंट बिना नोटिस, पहचान पत्र और अधिकृत आदेश के वाहन जब्त नहीं कर सकता। ऐसे में जबरन बाइक छीनना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है और इसे लूट की श्रेणी में रखा जा सकता है।
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ लूट और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी की जाए। साथ ही उसकी बाइक वापस दिलाई जाए ताकि उसे न्याय मिल सके।
Location : Budaun
Published : 18 April 2026, 4:49 PM IST